Shiv Puja: केतकी के फूलों को शिव जी ने कर दिया था खुद से दूर, इसलिये चढ़ाने से हो जाते हैं क्रोधित

आध्यात्म
Updated Mar 24, 2019 | 13:00 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Ketaki flower Restricted in Shiv Puja: केतकी के फूल भोलेबाबा को बिलकुल पसंद नहीं हैं। भोले बाबा की पूजा में इस फूल को चढ़ाना अच्छा नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।

God Shiv
God Shiv 

Ketaki flower not allowed in Shiv Puja: भगवान शिव (God Shiv) की पूजा में कई चीजों को इस्तेमाल करना मना है। इनमें से एक चीज है केतकी के फूल। ये फूल भगवान को चढ़ाने वाले को भगवान के कोप का भागी बनना पड़ता है। भगवान को केतकी के फूल से नफरत है। इस नफरत के पीछे एक कहनी है। एक वक्त था जब केतकी के फूल भगवान को पसंद थे लेकिन एक छोटी सी भूल के वजह से ये फूल भगवान की नजरों से उतर गए और इसके बाद से भगवान ने इस फूल से अपने पूजा में शामिल होने का अधिकार छीन लिया।

शिव जी को सफेद रंग के फूल बहुत प्रिय है और इसके बावजूद केतकी का फूल उनको कभी भी समर्पित नहीं किया जाता है। आखिर केतकी के फूल ने ऐसा कौन सा गुनाह किया था आइए एक दंतकथा के माध्यम से जाने इसके पीछे की कहानी।

केतकी के फूलों से नाराज होने की वजह

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु में इस बात को लेकर विवाद हुआ कि दोनों में कौन सबसे ज्यादा बड़ा है। विवाद गहराता गया लेकिन फैसला नहीं हो पा रहा था। इस फैसले के लिए ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही शिव जी के पास गए। शिव जी ने इस बात का फैसला करने के लिए अपनी माया से एक ज्योतिर्लिंग सामने ला दिया और दोनों से कहा कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत बताएगा वही बड़ा होगा। तय हुआ की ब्रह्मा जी आरंभ का पता लगाएंगे और विष्णु जी अंत का।

ब्रह्माजी ज्योतिर्लिंग के नीचे उसका आरंभ खोजने निकल पड़े जबकि विष्णु जी अंत की तलाश में ऊपर की ओर चल पड़े। कुछ दूर चलने के बाद ब्रह्माजी को केतकी का फूल अपने साथ आते हुए दिखा। यह देख कर ब्रह्माजी ने केतकी के फूल को यह कहा कि वह इस बात की गवाही दे की शिवलिंग के आरंभ का पता चल गया है और ब्रह्मा जी ने उसे जान लिया है।

वहीं दूसरी ओर विष्णु शिव जी के पास लौट कर आए और कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग के अंत का पता नहीं चल सका। जबकि ब्रह्माजी ने अपनी बात को सच साबित करने के लिए केतकी के फूल से झूठी गवाही दिलाई। लेकिन शिव जी को सच पता था कि केतकी के फूल और ब्रह्मा जी दोनो झूठ बोल रहे हैं। भगवान शिव ने झूठ के क्रोध में आ कर ब्रह्मा जी का सिर काट दिया और केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया। तब से केतकी के फूल सफेद होने के बाद भी शिव जी को चढ़ाना सख्त मना है।

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