Dhanteras 2020: धनतेरस के दिन जानिए क्यों होती है भगवान धनवंतरि की पूजा? क्या है सौभाग्यवर्धक पूजन विधि 

Worship of Lord Dhanwantari on Dhanteras: दीपावली से पहले धनतेरस के दिन भगवान धनव्ंतरि की पूजा का विधान है। इस दिन कुबेर और मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।

Lord Dhanwantari
धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है। 

मुख्य बातें

  • धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है
  • धनतरेस के दिन खरीदारी को शुभ काफी शुभ माना जाता है
  • इस दिन पीली धातु और बर्तन खरीदने की परंपरा है

नई दिल्ली: धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ,कुबेर की भी अराधना की जाती है। धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को धनतेरस के रुप में मनाया जाात है । स्कंद पुराण के मुताबिक समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। जब वह प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत कलश और पीतल के आभूषण थे। इसलिए धनतेरस पर भगवान की पूजा के साथ बर्तन या किसी पीली धातु को जरूर खरीदा जाता है। इस वर्ष धनतेरस 13 नवंबर और दिपावली 14 नवंबर को है। 

पौराणिक मान्यता है कि ऐसा करने भगवान धन्वंतरि आरोग्य और धन का आशीर्वाद देते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो कुछ भी आप खरीदते हैं उसमें 13 गुणा बढ़ोतरी होती है। इस दिन धनिया के बीज को भी खरीदने का विधान होता है जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है और बाकी बचे बीजों को दीपावली के बाद लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं। धनतेरस के दिन लोग नई चीजों की खरीदारी करते हैं। माना जाता है कि घर में नया सामान (सोना, चांदी और बर्तन) लाने से पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही धनतेरस के मौके पर सोने की खरीददारी का विशेष प्रचलन है।


देवताओं के चिकित्सक हैं धन्वंतरि

स्कंद पुराण के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अवतार थे और जब समुद्र मंथन हुआ था तो भगवान धन्वंतरि के साथ शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वदशी के दिन कामधेनु गाय, त्रयोदशी के दिन धन्वंतरि, चतुर्दशी के दिन मां काली और अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए दिवाली से पूर्व धनतेरस मनाया जाता है। यह सर्वविदित है कि जहां स्वास्थ्य होता है वहीं लक्ष्मी का वास इसलिए भगवान धनवंतरि की जहां पूजा होती है, मां लक्ष्मी वहां अपने आप आ जाती हैं ऐसा पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है। इसलिए धनतेरस पर धनवंतरि, कुबेर और लक्ष्मी मां की पूजा जरूर करनी चाहिए।

कार्तिक त्रयोदशी पर भगवान धनवंतरी की पूजा विधिपूर्व करें और उनके मंत्र, स्त्रोत और आरती कर के अपने और अपने परिवार के लिए आरोग्य और धन का आशीर्वाद प्राप्त करें।

भगवान धनवंतरि का महामंत्र

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धनवंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय।
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री अष्टचक्र नारायणाय नमः॥

धनवंतरि स्तोत्रम का पाठ भी करें

ओम शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम॥

आरती श्री धनवंतरि भगवान की

कमलनयन शामवर्ण,पीतांबर साजे
मनमोहन वस्त्राने, आदिदेव विलसे
शंखचक्र जलौका, अमृतघट हाती
चर्तुभुजजांनी अवघ्या, दुखाला पल्लवी
जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा

सकलजनांना धावा आरोग्य देवा
जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा
नमामि धनवंतरी, नमामि धनवंतरी
देवांयानी दैत्यानी, मंथन ते केले

त्यातुन अमृतकलशा, घनेऊनिया आले
भय दुख सरण्या, जरा मृत्यु हरण्या
सकलांना त्याचे, संजीवीनी झाले
जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा

सकलजनांना धावा, आरोग्य देवा
जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा
नमामि धनंवतरी, नमामि धनवंतरी
शास्त्रांचे परिशीलन, अनुभव कर्मांचा

बुध्दीने तर्काने, तत्पर ती सेवा
शुचिदर्श सत्यधर्म, संयत उदारता
श्रीकांतासह सालया, आशिर्वच धावा
जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा

सकलजनांना धावा, आरोग्य देवा

जय देव, जय देव, धनवंतरी देवा।।

धनतेरस का पर जरूर करें ये काम

  1. इस दिन पीली धातु और बर्तन जरूर खरीदें।
  2. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ मां लक्ष्मी, कुबेर की भी पूजा करें।
  3. धनतेरस पर धनिया भगवान को जरूर चढ़ाएं और दीवाली के बाद इसे गमले या खेत में बो दें।
  4. शुभ मुहूर्त में पूजा में सात धानों की पूजा करें। 
  5. इस दिन दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा खरीदें।
  6. इसमें गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल करें।
  7. प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआँ, मंदिर आदि पर तीन-तीन दीपक सूर्य डूबने से पूर्व जलाएं।
  8. नया झाडू जरूर खरीद कर घर लाएं और पुराने को किसी पेड़ के नीचे रख दें।
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