chanakya niti for success : सफलता के ल‍िए चाणक्‍य ने दी श‍िकारी जैसा बनने की सलाह, जानें उनके सफलता के सूत्र

Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य ने मनुष्य को किसी मकसद में सफल होने के लिए शिकारी की तरह व्यवहार करने को कहा है। ठीक वैसे ही जैसे एक खास पशु के शिकार के लिए शिकारी अपना व्यवहार बदल लेता है।

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Chanakya Niti, चाणक्य नीति 

मुख्य बातें

  • सफला के पाने की प्रथम कुंजी मनुष्य का व्यवहार होता है
  • मुधर व्यवहार वाला मनुष्‍य हर काम में सफल होता है
  • हिरन के शिकारी की तरह मनुष्य को काम करना चाहिए

खुशहाल जिंदगी तभी होती है, जब मनुष्य अपने कार्य और उद्देश्य में सफल होता है। आचार्य चाणक्य ने मनुष्य को जीवन में सफल होने और खुशहाल जिंदगी के लिए अपनी नीतियों में कई सलाह दी है। उनकी नीतियों और विचारों पर चल कर चंद्रगुप्त मौर्य संपूर्ण भारत के सम्राट बने। चाणक्य की ये  नीतियां आज भी उसी तरह से प्रासंगिक हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में इस बात का उल्लेख किया है कि यदि किसी कार्य में मनुष्य को सफल होना है तो उसे एक खास पशु के शिकार करने वाले शिकारी की तरह से व्यवहार करना चाहिए, तभी कार्य में सफलता मिल सकती है।

chanakya ke safalta ke sootra : कार्य की सफलता के लिए ऐसा होना चाहिए इंसान का व्यवहार

  1. चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि यदि इंसान को किसी कार्य में सफल होना अथवा अपने किसी लक्ष्य या मकसद में सफल होना है तो उन्हें अपने व्यवहार में मुधरता लानी चाहिए। चाणक्य ने मधुर व्यवहार को सफलता की कुंजी माना है। चाणक्य का कहना था कि जैसे शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज में गाता है और हिरण उसकी मधुर आवाज से मंत्रमुग्ध हो कर उसके चुंगल में फंस जाता है।
  2. आचार्य चाणक्य ने मनुष्य को अपने काम करने के तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी है। उनकी सलाह यह है कि काम करने का जो तरीका मनुष्य को पसंद हो, उसी तरह से काम करना चाहिए। किसी अन्य के बताए तरीके से कार्य करने पर कार्य की सफलता को बाधित हो सकती है।
  3. किसी कार्य की सफलता के लिए यदि मनुष्य के अपने व्यवहार में परिवर्तन करना पड़े तो जरूर करना चाहिए। यानी यदि आपको काम पाने के लिए सामने वाले के व्यवहार या मन के मुताबिक बात करनी पड़े तो करना चाहिए। इससे आपको कार्य में सफल होने के प्रतिशत बढ़ जाएंगे।
  4. किसी से अपना काम करवाना के लिए अपनी भाषा, व्यवहार और शारीरिक मुद्रा पर बहुत ध्यान देने की जरूरत होती है। यदि आपको जिससे काम लेना है यदि वह आपके साथ न हो तो आपके कार्य की सफलता संभव नहीं होगी।
  5. एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मुधर आवाज में गाता है और हिरन उसकी मुधर आवाज से मोहित हो जाता है। इससे शिकारी का काम आसान हो जाता है। ठीक इसी तरह मनुष्य को अपने काम कराने के लिए अथवा काम पाने के लिए शिकारी की तरह व्यवहार करना चाहिए।

व्यवहार किसी भी मनुष्य का उसके विकास और सफलता को तय करने का सबसे पहला मापदंड होता है। चाणक्य ने इसे ही मनुष्य को समझाने का प्रयास किया है। 

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