Namaskar Benefits: एक्यूप्रेशर की तरह काम करता है नमस्कार, मनुष्य के अंदर से दूर करता है अहंकार

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तर्क के अनुसार नमस्कार करना इंसान के लिए बहुत फायदेमंद बताया गया है। नमस्कार करने से ना ही सिर्फ रिश्ते मजबूत होते हैं बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।

Namaste
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मुख्य बातें

  • भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है नमस्कार।
  • नमस्कार करने से अहंकार रहता है दूर, रिश्तो में बनी रहती है मधुरता।
  • नमस्ते करने से शरीर में प्रवाह होती है सकारात्मक ऊर्जा।

दुनिया में भारतीय संस्कृति को बहुत अद्भुत माना जाता है। भारतीय संस्कृति ना ही सिर्फ हमें जीने का तरीका सिखाती है बल्कि यह हर एक मनुष्य को आपस में बांध कर भी रखती है। 

भारत में जब भी किसी का अभिवादन किया जाता है या किसी को अलविदा किया जाता है तब लोग नतमस्तक हो जाते हैं। जानकार यह मानते हैं कि नमस्ते करने से हमारे अंदर दूसरों के प्रति स्नेह जागृत होता है और नमस्ते करने वाले व्यक्तियों के बीच में संबंध मजबूत होता है। 

वैज्ञानिक तर्क के मुताबिक नमस्ते करने से हमारा मन प्रसन्न रहता है और हमारा मस्तिष्क शांत रहता है। बहुत से लोगों के पास सिर्फ यह जानकारी रहती है कि नमस्ते करना हमारी परंपरा है लेकिन वह नमस्ते करने के पीछे जुड़ी वजह से अनजान रहते हैं। 

यहां जानिए भारतीय संस्कृति में क्यों है नमस्कार करने की परंपरा।

नमस्कार करने से संबंध होते हैं मजबूत
भारतीय परंपरा के अनुसार नमस्कार करते समय हम सामने वाले के लिए सम्मान प्रकट करते हैं। जब वह इंसान भी हमें नमस्कार करता है तो हमारे बीच में एक अध्यात्मिक संबंध बनता है। 

नमस्कार करने से हमारे रिश्ते मजबूत होते हैं। आंखें बंद करके नमस्कार करने से हम अपनी अंतरात्मा पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और जो हमारे अंदर हैं हम उसे देख सकते हैं। 

एक्यूप्रेशर की तरह करता है काम
विज्ञान के अनुसार नमस्कार करने से हमारे प्रेशर पॉइंट्स एक्टिवेट हो जाते हैं। हाथ जोड़ने से दिमाग, कान और आंखों के प्रेशर पॉइंट्स एक्टिवेट हो जाते हैं जिसकी वजह से हम किसी इंसान को लंबे समय तक याद रख सकते हैं।

नमस्कार शब्द नमः से बना है जिसका मतलब की हम सामने वाले को हर एक क्षेत्र में अपने से उत्तम मान रहे हैं और उसकी लिए अपना आभार प्रकट कर रहे हैं। ऐसा करने से हमारे और सामने वाले के बीच में स्नेह बना रहता है और अहंकार दूर होता है। 

नकारात्मक उर्जा से रहते हैं दूर
फिजिकल कांटेक्ट की वजह से सामने वाले इंसान के अंदर मौजूद नकारात्मक उर्जा हमारे अंदर भी ट्रांसफर हो जाती है। लेकिन नमस्ते करते समय सामने वाले इंसान की नकारात्मक ऊर्जा उस तक ही रह जाती है। ‌

नमस्ते करते समय हम किसी इंसान से फिजिकल कॉन्टेक्ट में नहीं आते हैं जिसकी वजह से सामने वाले इंसान के अंदर मौजूद कीटाणु और वायरस हमारे अंदर ट्रांसफर नहीं हो पाते हैं। 

सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान 
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है। यह पांच तत्व पृथ्वी, वायु, वैक्यूम, अग्नि और जल हैं जो हमारे शरीर में उर्जा उत्पन्न करते हैं। कहा जाता है कि वैक्यूम को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है। 
 
नमस्कार करने से हमारे शरीर के अंदर मौजूद वैक्यूम ब्रह्मांड में मौजूद वैक्यूम से जुड़ती है जिसके वजह से शरीर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है। जब दो इंसान आपस में नमस्कार की मुद्रा में मौजूद रहते हैं तब दोनों के बीच में सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है। 
 

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