अनंत चतुर्दशी पर विष्णु जी की कृपा के लिए करें पूजा, जानें मंत्र और अनंत सूत्र बांधने का शुभ मुहूर्त

Anant Chaturdashi 2020 Importance: अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन विष्णु जी के अनंत स्वरूपों की पूजा के साथ अनंत सूत्र भी बांधा जाता है।

Anant Chaturdashi Puja vidhi,अनंत चतुर्दशी पूजा विधान
Anant Chaturdashi Puja vidhi,अनंत चतुर्दशी पूजा विधान 

मुख्य बातें

  • अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत अवतार की पूजा होती है
  • अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर चढ़ाए
  • देवी लक्ष्मी की पूजा के बिना भगवान विष्णु की पूजा होती है अधूरी

अनंत चतुर्दशी का व्रत सर्वप्रथम पांडवों ने भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए किया था। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन का नाम अनंत चतुर्दशी पड़ा है। इस दिन मनुष्य यदि भगवान विष्णु की पूजा करता है, लेकिन उसे भगवान के सारे ही अवतारों से आशीवार्द की प्राप्ति होती है। साथ ही देवी लक्ष्मी भी उससे प्रसन्न रहती हैं।

1 सितंबर यानी आज मंगलवार के दिन भगवान की पूजा विशेष विधि और मंत्रों के साथ करनी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की आराधना यदि मनुष्य करता है तो उसके जीवन की हर आस पूरी होती है और अमोघ पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत करने के साथ भगवान विष्णु अनंत रूपों के नाम का जाप जरूर करना चाहिए। साथ ही इस दिन पूजा कर अनंत सूत्र बांधना बहुत ही फलदायी और संकटहरण माना गया है।

इस विधि से करें अनंत चतुर्दशी की पूजा

1.अनंत चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठ कर स्नान कर लें और स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंद जरूर मिलाएं।

2.पूजा स्थल पर भी गंगाजल का छिड़काव कर उसे पवित्र करें।

3.इसके बाद भगवान की प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना के लिए एक चौकी लगाएं और उस पर पीला वस्त्र बिछाकर आसान लगाएं।

4.अब इस आसन वाले कपड़े पर कुमकुम से स्वास्तिक बना लें और अक्षत व फूल से स्वास्तिक बना कर उसकी भी पूजा करें।

5.अब भगवान भगवान विष्णु की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें और प्रणाम कर पूजन की प्रक्रिया शुरू करें।

6.सर्वप्रथम भगवान के माथे पर चंदन का तिलक लगाएं और इसके बाद फूल,तुलसी दल,फूलों का हार व फल चढ़ाएं।

7.अब धूप-दीप जला कर भगवान विष्णु का चालीसा और स्तुति गाएं।

8.अब भगवान विष्णु के अनंत स्वरूपों को याद करें। उनके सभी नामों का जाप करें और जयकारा लगाएं।

9.अब एक सफेद कच्चा धागा लेकर उसे हल्दी के पानी में डुबो कर उसमें 14 गांठ बांध लें और

10.भगवान विष्णु को यह अनंत सूत्र अर्पित करें। भगवान की पूजा के बाद ये अनंत सूत्र आप धारण कर लें।

11.अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और सबको प्रसाद वितरित करें।

अनंत चतुर्दशी मंत्र

अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।

अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।

अनंत सूत्र बांधते हुए उपरोक्त मंत्र का जाप करें। साथ ही इस मंत्र को आप तुलसी की माला से 2 माला जाप भी करें।

अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त/ अनंत सूत्र बांधने का शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी शुभ मुहूर्त – 1 सितंबर, मंगलवार – सुबह 05:59 से सुबह 09:38

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करना न भूलें। अन्यथा आपकी पूजा अधूरी रह जाएगी।

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