विक्रम लैंडर की खोज: चंद्रमा की सतह से तस्वीरें लेने में नाकाम रहा ऑर्बिटर, NASA ने दी जानकारी

साइंस
Updated Sep 19, 2019 | 12:00 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि उनके ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की तस्वीरों को लेने में नाकाम रहा है। नासा के वैज्ञानिक ने ईमेल के जरिए ये जानकारी दी है।

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नासा  |  तस्वीर साभार: AP

नई दिल्ली : चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर का जमीनी संपर्क टूटने से देशवासियों सहित पूरी दुनिया में निराशा फैल गई थी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के सिवन ने इसके बाद कहा था कि वे जल्द ही विक्रम लैंडर से संपर्क साधने में कामयाब होंगे। चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर लैंड करने से कुछ मिनटों पहले ही लैंडर का इसरो के कंट्रोल रुम से संपर्क टूट गया था जिसके बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने गहरा दुख व्यक्त किया था। 

इसरो के वैज्ञानिकों के प्रयास की सराहना करते हुए नासा ने कहा था कि वह विक्रम लैंडर की खोज करने में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की मदद करेगा। अब नासा ने इस पर रिसर्च करने के बाद अपना बयान जारी किया है। नासा ने कहा है कि इसके ऑर्बिटर में लगा कैमरा विक्रम लैंडर की तस्वीर कैप्चर करने में नाकामयाब रहा। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि ऑर्बिटर के कैमरे में विक्रम लैंडर की तस्वीर कैप्चर नहीं हो पाई इसका मतलब ये हो सकता है कि जहां तक कैमरे का एंगल है उस एरिया विशेष में लैंडर उपस्थित नहीं है।  

नासा के लूनर रिकनैसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) जो 10 सालों से चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है। नासा ने कहा कि चंद्रमा की लक्षित सतह पर घूमने के बाद भी ऑर्बिटर के कैमरे में लैंडर की कोई तस्वीर नहीं आई। नासा के प्लानेट्री साइंस डिविजन के पब्लिक अफेयर्स ऑफिसर जोशुआ ए हैंडल ने एक ईमेल के जरिए ये जानकारी दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम से 7 सितंबर को संपर्क खो दिया था। 

एलआरओ के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ने बताया कि हमारे ऑर्बिटर के द्वारा लिए गए तस्वीरों का विश्लेषण किया जा रहा है और उसमें लैंडर की उपस्थिति का पता लगाया जा रहा है। बताया कि इन तस्वीरों में कई सारे पिक्सल्स हैं जिन पर काम किया जाना है। उन्होंने बताया कि इसके बाद नासा इसपर अपना बयान जारी करेगा। 

उन्होंने आगे बताया कि 14 अक्टूबर को उनका ऑर्बिटर एक बार फिर से चंद्रमा के उस सतह का चक्कर लगाएगा और इस बार कुछ अच्छे की उम्मीद की जा सकती है। फिर दोनों तस्वीरों को नासा तुलनात्मक विश्लेषण करके पता लगाने की कोशिश करेगा। चूंकि लैंडिंग सतह पर काफी एरिया शैडो से ढंका रहता है जिस कारण लोकेशंस का पता लगाने में थोड़ी मुश्किल आती है। 

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