भारत की सबसे लंबी और सबसे छोटी ट्रेन कौन सी? एक चार दिन में कराती है नौ राज्यों का सफर, तो दूसरी का शुरू होते ही हो जाता है खत्म

भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है, भले ही भारत में अंग्रेजों ने गुलामी के दौर में पहली ट्रेन चलाई हो, लेकिन आजादी के बाद हर बदलते दौर के साथ रेलवे भी कदम से कदम मिलाकर चलता रहा और खुद को और विकसित करता गया, इसी कारण तो भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क बन गया है। भारत की विविधता की तरह ही भारतीय रेलवे भी विविध ट्रेनें चलाता है। भारत में कहीं हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेनें हैं, तो कहीं पहाड़ों के बीच धीरे-धीरे चलने वाली छोटी लेकिन बेहद खूबसूरत रेल लाइनें भी हैं। भारतीय रेलवे की यही विविधता इसे खास बनाती है। ऐसे में आज हम आपको भारत की ऐसी दो ट्रेनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बेहद खास हैं। इनमें से एक जहां चार दिन लगातार सफर करती है तो दूसरी का सफर शुरू होते ही खत्म हो जाता है। आइए जानें भारत की सबसे लंबे रूट वाली और सबसे छोटे रूट वाली ट्रेन के बारे में...

Slideshow/s by: शिव शुक्लाUpdated Mar 14 2026, 19:09 IST
मिलता है अलग ही आनंद01 / 08

मिलता है अलग ही आनंद

देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली विवेक एक्सप्रेस जहां उत्तर-पूर्व के डिब्रूगढ़ से लेकर दक्षिण के कन्याकुमारी तक भारत को जोड़ती है, वहीं नीलगिरि माउंटेन रेलवे की ऊटी टॉय ट्रेन छोटी दूरी के बावजूद अपने प्राकृतिक नजारों और ऐतिहासिक महत्व के लिए मशहूर है। इस फोटो स्टोरी में हम आपको भारतीय रेलवे की कुछ ऐसी अनोखी ट्रेनों और रूट्स से रूबरू कराएंगे, जो अपनी लंबाई, खूबसूरती, तकनीक और खासियतों के कारण चर्चा में रहती हैं। इन तस्वीरों के जरिए आप देखेंगे कि कैसे भारतीय रेल देश के अलग-अलग कोनों को जोड़ते हुए यात्रियों को एक अनोखा अनुभव देती है।

दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में भारतीय रेलवे02 / 08

दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, जो हर दिन लाखों यात्रियों को देशभर में जोड़ता है। भारत में कुछ ट्रेनें हजारों किलोमीटर की दूरी तय करती हैं और कई राज्यों को जोड़ते हुए लंबी यात्राओं का अनुभव देती हैं।

कौन है सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन​03 / 08

कौन है सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन​

देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन विवेक एक्सप्रेस है। यह ट्रेन कुल 4188 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इस सफर में करीब 80 घंटे यानी करीब 4 दिन का समय लगता है। यह ट्रेन असम के डिब्रूगढ़ और तमिलनाडु के कन्याकुमारी के बीच चलती है।

​What are longest and shortest trains in India? Know about Vivek Express and Mettupalayam-Ooty passenger train04 / 08

​What are longest and shortest trains in India? Know about Vivek Express and Mettupalayam-Ooty passenger train

यह लगभग 4,286 किलोमीटर की दूरी लगभग 80 से 85 घंटे (लगभग 4 दिन) में तय करती है। यह पूर्वोत्तर राज्य असम से शुरू होकर भारत के सबसे दक्षिणी छोर तमिलनाडु तक नौ राज्यों से होकर गुजरती है। करीब 4286 किलोमीटर की यह यात्रा भारत के उत्तर-पूर्व से दक्षिण तक देश की भौगोलिक विविधता दिखाती है।

विवेक एक्सप्रेस के नाम दर्ज है यह रिकॉर्ड05 / 08

विवेक एक्सप्रेस के नाम दर्ज है यह रिकॉर्ड

विवेक एक्सप्रेस अपने चार दिनों के सफर के दौरान असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य समेत कुल मिलाकर नौ राज्यों से गुजरती है। इस दौरान गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, खड़गपुर, कटक, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और कोयंबटूर सहित 50 से अधिक प्रमुख स्टेशन आते हैं। भारतीय रेलवे नेटवर्क में दूरी और समय दोनों के हिसाब से सबसे लंबे ट्रेन मार्ग का रिकॉर्ड इसी के नाम है।

​और सबसे छोटी ट्रेन कौन सी?​06 / 08

​और सबसे छोटी ट्रेन कौन सी?​

इसके विपरीत भारत में कुछ छोटी लेकिन बेहद खास रेल लाइनें भी हैं, जो पर्यटन के लिए मशहूर हैं। तमिलनाडु की नीलगिरि माउंटेन रेलवे की ऊटी टॉय ट्रेन अपनी सुंदर पहाड़ी यात्रा के लिए जानी जाती है। करीब 46 किलोमीटर का यह सफर घने जंगलों, सुरंगों और पहाड़ी घाटियों से होकर गुजरता है।

कहां चलती है ये ट्रेन 07 / 08

कहां चलती है ये ट्रेन

ये ट्रेन तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ियों पर चलती है और यह भारत में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है। पर्यटक खास तौर पर इसकी सवारी करने यहां पहुंचते हैं और इससे यात्रा कर यादगार पलों को संजोते हैं।बेहद खड़ी ढलान के कारण ये ट्रेन भारत में सबसे धीमी ट्रेन बन गई है। इस ट्रेन से 46 किमी की दूरी तय करने में लगभग पांच घंटे लगते हैं। वापसी यात्रा में एक घंटे की कटौती हो जाती है, लेकिन सड़क मार्ग से यात्रा उतना ही समय लेती है।

मिला है खास दर्जा08 / 08

मिला है खास दर्जा

नीलगिरी माउंटेन रेलवे की शुरुआत तो 1854 में हो गई थी, लेकिन यहां के पहाड़ों पर रेलवे का निर्माण 1891 में शुरू हो पाया। 1908 तक यह रूट बनकर तैयार हो गया। यह देश में इकलौती लाइन है, जिस पर पुराने स्टीम इंजन अब भी चल रहे हैं और यह अपने यात्रियों को इतिहास की याद दिलाती रहती है। अब इसका संचालन साउथ रेलवे करती है। साल 2005 में UNESCO ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया और इसे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के एक्सटेंशन के रूप में मान्यता दी।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!