दिमाग तो जन्मजात था हमारे पास, फिर भी बचपन की कई सारी चीजें हमें क्यों नहीं याद रहतीं? जानें क्या है माजरा
क्या आपने कभी यह सोचा है कि हमें अपने जीवन के शुरुआती कुछ साल क्यों नहीं याद रहते? अगर आपका दिमाग कभी इस पर गया हो तो जरा गौर करिएगा। वैसे इसके पीछे का कारण आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि बचपन के शुरुआत के 4-5 साल की चीजें हमें याद क्यों नहीं रहती।
क्या आपने यह कभी गौर किया है?
अगर आप इस बात पर गौर करें तो आपको ऐसा लगेगा कि बचपन के कुछ साल हमें याद ही नहीं होते। लोग अक्सर बोलते हैं कि, "जब से मैंने होश संभाला है, तब से..." यानी कि उससे पहले की चीजें हमें बिल्कुल भी याद नहीं रहतीं। बचपन में 5-6 साल से पहले की यादें अक्सर हमारे दिमाग में नहीं होतीं।
हम बताएंगे आपको इसके पीछे का कारण
हमारे माता-पिता या फिर दादा-दादी उस दौरान की बातें हमें बताते हैं कि, "बचपन में हम क्या किया करते थे, वगैरह-वगैरह..." ऐसे में क्या आपने यह कभी सोचा है कि हमें बचपन के उस वक्त की चीजें क्यों नहीं याद रहतीं? आइए आज हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है।
क्यों होता है ऐसा?
दरअसल, बचपन में बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है। इस समय, बच्चों के दिमाग में कोई भी चीज नहीं टिकती और उनकी यादें स्टोर करने की क्षमता कम होती है। इसे हम (Childhood Amnesia) बचपन की भूलने की बीमारी कहते हैं।
नवजात बच्चों में दिमाग का यह हिस्सा नहीं हुआ होता है विकसित
बता दें कि नन्हें बच्चों के दिमाग में Hippocampus नाम का हिस्सा अधूरा रहता है। वह पूरी तरह से डेवलप नहीं हुआ रहता है। दिमाग का यही भाग यादों को लंबे समय तक स्टोर करता है। हालांकि नन्हें बच्चों के दिमाग में ये हिस्सा अभी पनप रहा होता है इसलिए हमें अपने शुरुआती बचपन की चीजें याद नहीं रहतीं।
भाषा की समझ है दूसरी वजह
इसके पीछे एक और भी वजह है, जहां माना जाता है कि बचपन की यादें बच्चों के दिमाग में इसलिए भी नहीं टिकती क्योंकि उस वक्त उन्हें भाषा की समझ नहीं होती। हमारा दिमाग यादों को शब्दों में स्टोर करता है। बच्चों की यादें ज्यादातर भावनाओं में होती हैं, जैसे आवाज, रोशनी, स्वाद… लेकिन ये सारी चीजें स्पष्ट यादें नहीं बना पातीं।
बच्चों में इमोशनल कनेक्शन होता है कम, यह भी एक कारण
बता दें कि हमारा दिमाग लगातार नए न्यूरॉन बना रहा होता है। इस तेज निर्माण से पुरानी यादें मिट जाती हैं और नई स्टोर हो जाती हैं, यानी कि ये overwrite हो जाती हैं। बचपन में हमारी भावनाएं कच्ची होती हैं। ऐसे में इमोशनल कनेक्शन कम होता है, इसलिए हमारी यादें भी कमजोर हो जाती हैं।
बहुत जल्दी बंटता है बच्चों का ध्यान
बचपन में आपने देखा होगा कि बच्चों का ध्यान बहुत ही जल्दी बंटता है। अगर आपके घर बच्चा हो तो आप गौर करिएगा, उसका फोकस तुरंत-तुरंत बदल जाता होगा। फोकस के कम होने से हमारी याददाश्त भी कम होती है। उस उम्र में बच्चे अनुभव तो कर पाते हैं लेकिन कोई कहानी नहीं होती, जबकि हमारा दिमाग यादों को स्टोरी की तरह सेव करता है, जो कि बच्चे ऐसा नहीं कर पाते।
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