आपने हंसों को पानी में तैरते हुए जरूर देखा होगा। बाहर से ये देखने में बहुत ही सुंदर लगते हैं लेकिन जब आप इनके मुंह को खोलकर देखेंगे तो आपको यह पक्षी किसी खूंखार की तरह नजर आएगा।
वजह! इसके चोंच और जीभ पर निकले हुए नुकीले और छोटे-छोटे दांत जैसी चीज है जो किसी दैत्य की तरह दिखती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या उनके जीभ और चोंच के चारों तरफ सचमुच के दांत होते हैं?
हालांकि देखने में ये किसी दांत की तरह ही नजर आते हैं लेकिन असल में ये दांत नहीं होते। हंस की जीभ के किनारों पर नुकीले कांटे होते हैं और ये उनकी चोंच के अंदरूनी हिस्से में भी होते हैं।
बता दें कि हंस समेत किसी भी पक्षी के दांत नहीं होते। उनके मुंह में मौजूद इन नुकीले कांटों को टोमिया कहते हैं। टोमिया उपास्थि और पक्षी की जीभ व चोंच के हिस्से से बना होता है, लेकिन कई मायनों में ये दांतों की तरह ही काम करते हैं।
हंस समेत किसी भी पक्षी के दांत नहीं होते। कुछ पक्षियों की चोंच के आसपास धारियां होती हैं जो उन्हें भोजन को निगलने से पहले छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद करती हैं। कुछ ऐसा ही तंत्र हंस की चोंच के अंदरूनी हिस्से और जीभ पर होता है।
सामान्य दांत, जैसे कि मनुष्य के दांत, हड्डी के बने होते हैं जिन पर इनेमल की परत चढ़ी होती है। लेकिन टोमिया उपास्थि से बना होता है, इसलिए यह अधिक लचीला होता है और सामान्य दांतों जितना कठोर नहीं होता। यह कान, नाक और जोड़ों में पाई जाने वाली उपास्थि जैसे ही सॉफ्ट होता है।
हंस की जीभ की दांतेदार धारियां उनके खाने और पचाने में काफी मदद करती हैं। जैसे इंसान अपने काम करने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करता है, वैसे ही हंस खाने के लिए अपनी इस कांटेदार जीभ का ही इस्तेमाल करते हैं।
उनकी जीभ पर निकली ये कांटेदार धारियां एक तरह से औजार की तरह काम करती हैं जो इनके खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटती हैं, जिससे हंसों के लिए खाना निगलना और उसे पचाना काफी आसान हो जाता है।