यह सिर्फ सजावट के लिए नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया डिजाइन फैसला है। पिंक लाइन (लाइन 7) और मैजेंटा लाइन (लाइन 8) को दिल्ली मेट्रो के फेज-3 के तहत शुरू किया गया था। ये लाइनें पुरानी लाइनों की तुलना में ज्यादा आधुनिक सुविधाओं के साथ बनाई गई हैं।
इसी वजह से इनके कोच भी नए डिजाइन और बेहतर लुक के साथ तैयार किए गए। रंगीन सीटों का मकसद यात्रियों को सुविधा देना और कोच को ज्यादा आकर्षक बनाना था। इन लाइनों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें और कोच पहचानने में आसानी हो, इसलिए गुलाबी रंग का उपयोग किया गया है।
इससे यात्रियों को बिना किसी परेशानी के समझ आ जाता है कि कौन-सी सीट महिलाओं के लिए है। वहीं सामान्य यात्रियों की सीटों के लिए नीले और नारंगी जैसे रंग रखे गए हैं, ताकि कोच का माहौल हल्का और साफ दिखाई दे।
इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और जरूरतमंद यात्रियों के लिए आरक्षित सीटों को गहरे रंग से अलग दिखाया जाता है। इससे लोग तुरंत पहचान लेते हैं कि ये सीटें खास यात्रियों के लिए हैं और अनावश्यक भ्रम कम होता है।
यह छोटा सा बदलाव रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए काफी मददगार साबित होता है। अगर पुरानी लाइनों की बात करें, जैसे ब्लू लाइन या येलो लाइन, तो वहां सीटों का रंग ज्यादातर सिल्वर या ग्रे था।
लेकिन नई लाइनों में रंगों का इस्तेमाल करके मेट्रो को ज्यादा मॉडर्न और फ्रेंडली लुक दिया गया। कुल मिलाकर, पिंक और मैजेंटा लाइन की रंगीन सीटें सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं हैं।
बल्कि यात्रियों की सुविधा, आरक्षित सीटों की आसान पहचान और बेहतर सफर अनुभव देने के लिए बनाई गई हैं। यही कारण है कि ये लाइनें बाकी लाइनों से अलग और खास महसूस होती हैं।