आपने अलग-अलग तरह के बिजली वाले प्लग तो जरूर देखे होंगे। इनमें से कुछ दो पिन वाले होते हैं तो कुछ तीन पिन वाले। मगर क्या कभी उन प्लग में लगे चीरे या फिर कट पर कभी ध्यान गया है आपका? अगर नहीं, तो अगली बार गौर करिएगा। कई इलेक्ट्रिक प्लग के पिन में बीच में एक कट लगा होता है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि भला ये कट इलेक्ट्रिक प्लग में क्यों होते हैं और इनका क्या काम होता है? भले ही इस कट को आप आज तक नजरअंदाज कर देते हों, लेकिन प्लग में लगे ये कट यूं ही नहीं होते। इनके होने के पीछे एक खास वजह होती है।
बता दें कि इलेक्ट्रिक प्लग में बने ये कट हर प्लग में नहीं होते। ये उनमें ही होते हैं जिन प्लग की पीन पीतल केी बनी होती है। पीतल को विद्युत का सबसे अच्छा संचालक माना जाता है। अक्सर इन प्लग्स का इस्तेमाल हेवी-ड्यूटी वाले इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज में किया जाता है।
आपने इन प्लग के कट कुछ सिल्वर कलर वाले पिन में भी देखा होंगे, मगर ये असल में पीतल के ही बने होते हैं और उन्हें जंग से बचाने के लिए उन पर निकल (nickel) की कोटिंग कर दी जाती है। जो हमें सिल्वर कलर की दिखती है, लेकिन वे पिन भी पीतल के ही होते हैं।
इन प्लग्स के पिन में लगे कट या चीरे होने का असली कारण उसकी सुरक्षा और बेहतर कनेक्शन है। पीतल में करंट काफी अच्छे से प्रवाहित होता है। ऐसे में अगर ज्यादा देर तक करंट उस पिन से बहता है तो वह हीट की वजह से गर्म हो जाता है।
ऐसे में यह कट प्लग के पिन को गर्म होने पर उन्हें फैलने (expand) से रोकता है, जिससे वे सॉकेट में नहीं चिपकते हैं। अगर ये कट ना हों तो प्लग सॉकेट में ही चिपक सकता है। इसके अलावा, यह पिनों को थोड़ा लचीला बनाकर सॉकेट के अंदर मजबूती से फिट बनाए रखने में मदद करता है, जिससे स्पार्किंग और आग लगने का खतरा कम होता है।
अगर प्लग में ये कट ना हों तो लगातार करंट बहने की वजह से सॉकेट में आग भी लग सकती है और इलेक्ट्रिक अप्लायंस जल्दी खराब हो जाएंगे। इसलिए पीतल से बने पिन के ऊपरी हिस्से में कट लगाए जाते हैं ताकि करंट शुरू में ही दो हिस्सों में बंट जाए, जिसकी वजह से प्लग ज्यादा गर्म नहीं होगा और करंट काफी देर तक बिना किसी खतरे के सप्लाई होते रहेगा।