Ajab Gajab: भारत की सबसे छोटी जनजाति! इस समाज पर मंडरा रहा विलुप्त होने का खतरा

टोटो जनजाति पश्चिम बंगाल की एक बहुत छोटी और प्राचीन आदिवासी समुदाय है। यह जनजाति मुख्य रूप से जलपाईगुड़ी जिले के टोटोपारा गांव में रहती है। टोटोपारा भारत का एकमात्र गांव है जहां टोटो लोग रहते हैं। दुनिया की सबसे छोटी जनजातियों में टोटो समुदाय का नाम लिया जाता है।

Authored by: Monu JhaUpdated Feb 11 2026, 10:03 IST
आबादी करीब 1,500 से 1,700 के बीचImage Credit : IStock01 / 07

आबादी करीब 1,500 से 1,700 के बीच

उनकी आबादी करीब 1,500 से 1,700 के बीच मानी जाती है। ये लोग बहुत शांत और सीमित जीवन जीते हैं और बाहरी दुनिया से कम संपर्क रखते हैं। टोटो जनजाति की सबसे खास बात यह है कि वे अपनी ही जनजाति में शादी करते हैं।

​ एंडोगेमस परंपरा ​Image Credit : IStock02 / 07

​ एंडोगेमस परंपरा ​

इसे एंडोगेमस परंपरा कहा जाता है। यानी लड़का-लड़की दोनों टोटो समुदाय के ही होते हैं। बाहर शादी करने की परंपरा बहुत कम है। इसी वजह से उनके बीच कुछ जेनेटिक बीमारियां फैलने लगी हैं।

​सबसे बड़ी समस्या थैलेसीमिया ​Image Credit : IStock03 / 07

​सबसे बड़ी समस्या थैलेसीमिया ​

इनमें सबसे बड़ी समस्या थैलेसीमिया है। थैलेसीमिया एक तरह की खून की बीमारी होती है, जिसमें शरीर ठीक से स्वस्थ खून नहीं बना पाता। इससे इंसान जल्दी थक जाता है और बार-बार इलाज की जरूरत पड़ती है। रिसर्च के अनुसार, टोटो जनजाति में थैलेसीमिया का खतरा बहुत ज्यादा है।

​बच्चे में हो सकता है गंभीर थैलेसीमिया​Image Credit : IStock04 / 07

​बच्चे में हो सकता है गंभीर थैलेसीमिया​

कई रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 45 प्रतिशत से 80 प्रतिशत लोग इसके कैरियर हो सकते हैं। खासकर HbE नाम का प्रकार वहां काफी पाया जाता है। अगर माता-पिता दोनों इस बीमारी के कैरियर हों, तो बच्चे में गंभीर थैलेसीमिया हो सकता है।

​सरकार और कई एनजीओ भी कर रही मदद​Image Credit : IStock05 / 07

​सरकार और कई एनजीओ भी कर रही मदद​

सरकार और कई एनजीओ अब टोटो लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्हें बीमारी के बारे में समझाया जा रहा है, मेडिकल जांच कराई जा रही है और जेनेटिक काउंसलिंग दी जा रही है। साथ ही बाहर शादी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि बीमारी का असर कम हो सके।

​टोटो समुदाय की घट रही औसत उम्र ​Image Credit : IStock06 / 07

​टोटो समुदाय की घट रही औसत उम्र ​

ऐसे बच्चों को बार-बार ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है और उनकी जिंदगी मुश्किल हो जाती है। इसी वजह से टोटो समुदाय की औसत उम्र कम होती जा रही है और जनजाति के खत्म होने का खतरा भी बढ़ रहा है।

​स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा मामला​Image Credit : IStock07 / 07

​स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा मामला​

टोटो जनजाति का मामला सिर्फ परंपरा का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा है। यहां जरूरत है कि संस्कृति और विज्ञान के बीच सही संतुलन बनाया जाए, ताकि यह अनोखी जनजाति सुरक्षित रह सके।

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