जबकि नीचे घाटियों में बारिश हो रही होती है। इसी कारण लोग इसे 'धरती का स्वर्ग' भी कहते हैं। अक्सर यह दावा किया जाता है कि यहां बिल्कुल बारिश नहीं होती। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।
सच यह है कि गांव इतनी ऊंचाई पर है कि ज्यादातर बारिश वाले बादल इसके नीचे ही रह जाते हैं। इसलिए यहां बारिश बहुत कम होती है, लेकिन कभी नहीं होती, ऐसा कहना गलत होगा। कभी-कभी हल्की बारिश यहां भी होती है।
अब सवाल है कि कम बारिश के बावजूद यहां के खेत हरे-भरे कैसे रहते हैं? इसका जवाब है यहां की पारंपरिक खेती पद्धति। पहाड़ों की ढलानों पर सीढ़ीदार खेती, जिसे टेरेस फार्मिंग कहा जाता है, की जाती है।
इस तरीके से बारिश का थोड़ा-सा पानी भी बहकर नष्ट नहीं होता, बल्कि सीढ़ियों में रुककर जमीन में समा जाता है। इसके अलावा किसान ओस, कोहरे और आसपास की पहाड़ियों से आने वाली नमी को भी उपयोग में लेते हैं।
रात के समय हवा में मौजूद नमी मिट्टी में जमा हो जाती है, जिससे फसलों को फायदा मिलता है। यहां के लोग पीढ़ियों से इन तरीकों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
हराज क्षेत्र खास तौर पर अपनी उच्च गुणवत्ता वाली यमनी कॉफी के लिए जाना जाता है। ऊंचाई पर उगाई गई कॉफी का स्वाद और खुशबू अलग होती है, इसलिए यह दुनिया भर में पसंद की जाती है।
कुल मिलाकर, अल हुतैब गांव इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों में भी मेहनत और पारंपरिक ज्ञान के सहारे खेती को सफल बनाया जा सकता है।