ग्रह हमेशा गोल ही क्यों होते हैं, चौकोर क्यों नहीं? आप भी नहीं जानते होंगे वजह

आसमान में हम अक्सर ग्रहों को देखते हैं और यदि उनके बारे में जानकारी है तो ठीक है, नहीं तो हम उस ग्रह के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। आपने शुक्र, बुध, मंगल आदि ग्रहों को देखा होगा, लेकिन एक चीज आपने शायद ही कभी नोटिस किया होगा कि सभी ग्रह गोल ही क्यों होते हैं?

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated May 6 2026, 15:43 IST
आसमान में दिखाई देने वाले ग्रह हमेशा गोल क्यों होते हैं, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। आखिर वे चौकोर, त्रिकोण या किसी और आकार के क्यों नहीं होते? वैज्ञानिकों के अनुसार इसका जवाब प्रकृति के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण में छिपा है।Image Credit : Canva01 / 08

आसमान में दिखाई देने वाले ग्रह हमेशा गोल क्यों होते हैं, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। आखिर वे चौकोर, त्रिकोण या किसी और आकार के क्यों नहीं होते? वैज्ञानिकों के अनुसार इसका जवाब प्रकृति के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण में छिपा है।

गुरुत्वाकर्षण बनाता है गोल आकारImage Credit : Canva02 / 08

गुरुत्वाकर्षण बनाता है गोल आकार

जब कोई ग्रह बनता है, तो वह गैस, धूल और चट्टानों के छोटे-छोटे कणों से मिलकर बनता है। समय के साथ इन कणों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल काम करता है, जो सभी पदार्थों को केंद्र की ओर खींचता है।

खिंचाव का असरImage Credit : Canva03 / 08

खिंचाव का असर

इस प्रक्रिया में हर दिशा से बराबर खिंचाव होता है, जिससे वस्तु का आकार गोल यानी गोले जैसा हो जाता है। यही कारण है कि पृथ्वी सहित सभी बड़े ग्रह गोल दिखाई देते हैं।

संतुलन की स्थिति: हाइड्रोस्टैटिक इक्विलिब्रियमImage Credit : Canva04 / 08

संतुलन की स्थिति: हाइड्रोस्टैटिक इक्विलिब्रियम

वैज्ञानिक इस स्थिति को हाइड्रोस्टैटिक संतुलन कहते हैं। इसका मतलब है कि ग्रह के अंदर का दबाव और गुरुत्वाकर्षण बल एक संतुलन बना लेते हैं।

प्रकृति देती है आकारImage Credit : Canva05 / 08

प्रकृति देती है आकार

इस संतुलन में सबसे स्थिर और ऊर्जा की दृष्टि से सबसे उपयुक्त आकार गोला ही होता है। इसलिए प्रकृति खुद ही ग्रहों को गोल आकार दे देती है।

छोटे पिंड क्यों नहीं होते पूरी तरह गोल?Image Credit : Canva06 / 08

छोटे पिंड क्यों नहीं होते पूरी तरह गोल?

हर अंतरिक्ष पिंड गोल नहीं होता। छोटे एस्टेरॉइड या उल्कापिंड अक्सर अनियमित आकार के होते हैं। इसका कारण यह है कि उनका गुरुत्वाकर्षण बल इतना मजबूत नहीं होता कि वह उन्हें पूरी तरह गोल बना सके। जब कोई पिंड एक निश्चित आकार और द्रव्यमान से बड़ा हो जाता है, तभी वह गोल आकार ग्रहण करता है।

क्या चौकोर ग्रह संभव हैं?Image Credit : Canva07 / 08

क्या चौकोर ग्रह संभव हैं?

सिद्धांत रूप में चौकोर या किसी और आकार के ग्रह बनना लगभग असंभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि गुरुत्वाकर्षण हर कोने को खींचकर समतल कर देता है। अगर कोई वस्तु चौकोर बनने की कोशिश भी करे, तो समय के साथ उसके कोने टूटकर गोल हो जाएंगे। इसलिए ब्रह्मांड में स्थायी रूप से चौकोर ग्रह का अस्तित्व संभव नहीं माना जाता।

कुल मिलाकर कहें तो ग्रहों का गोल आकार कोई संयोग नहीं, बल्कि प्रकृति का नियम है। गुरुत्वाकर्षण और संतुलन की प्रक्रिया मिलकर उन्हें ऐसा बनाती है। यही कारण है कि चाहे पृथ्वी हो या कोई दूर का ग्रह, सभी लगभग गोल ही दिखाई देते हैं।Image Credit : Canva08 / 08

कुल मिलाकर कहें तो ग्रहों का गोल आकार कोई संयोग नहीं, बल्कि प्रकृति का नियम है। गुरुत्वाकर्षण और संतुलन की प्रक्रिया मिलकर उन्हें ऐसा बनाती है। यही कारण है कि चाहे पृथ्वी हो या कोई दूर का ग्रह, सभी लगभग गोल ही दिखाई देते हैं।

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