​फरवरी में देश के इस शहर में लगेगा काजू मेला, बदलेगी किसानों की किस्मत!​

​Cashew Fair: कर्नाटक सरकार काजू की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाने जा रही है। राज्य के वन मंत्री ईश्वर बी खांडरे ने घोषणा की कि अगले महीने यानी फरवरी 2026 में कर्नाटक के मंगलुरु में राज्य स्तरीय काजू मेला (Kaju Mela) आयोजित किया जाएगा। इस मेले का उद्देश्य काजू की खेती को प्रोत्साहित करना और काजू के क्षेत्र में मौजूद मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करना है। हालांकि, उन्होंने अभी मेले की सटीक तारीख की जानकारी नहीं दी है।​

काजू एक महत्वपूर्ण नकदी फसल
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​काजू एक महत्वपूर्ण नकदी फसल​

वन मंत्री ईश्वर बी खांडरे ने यह जानकारी कर्नाटक काजू विकास निगम के कार्यालय का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि काजू कर्नाटक की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है और इससे बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। सरकार चाहती है कि किसानों को काजू की खेती से अधिक लाभ मिले और यह क्षेत्र और मजबूत बने।

दक्षिण कन्नड़ जिला काजू उत्पादन में आगे
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​दक्षिण कन्नड़ जिला काजू उत्पादन में आगे​

मंत्री खांडरे ने बताया कि कर्नाटक में सबसे ज्यादा काजू उत्पादन दक्षिण कन्नड़ जिले में होता है। यहां की जलवायु और मिट्टी काजू की खेती के लिए काफी उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ काजू के कच्चे फल, बल्कि काजू के पौधों और प्रसंस्कृत काजू उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।

मांग ज्यादा आपूर्ति कम
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​मांग ज्यादा, आपूर्ति कम​

वन मंत्री के अनुसार काजू की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है, लेकिन फिलहाल आपूर्ति उस स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी कारण देश को काजू का आयात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में उत्पादन बढ़ाया जाए तो आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

काजू मेले से किसानों को मिलेगा लाभ
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​काजू मेले से किसानों को मिलेगा लाभ​

ईश्वर बी खांडरे ने कहा कि प्रस्तावित काजू मेला खासतौर पर तटीय क्षेत्रों के काजू किसानों को प्रोत्साहित करेगा। यह मेला किसानों, व्यापारियों और काजू उद्योग से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाएगा। इससे किसानों को नए बाजारों की जानकारी मिलेगी और वे सीधे व्यापारियों व उद्योग प्रतिनिधियों से जुड़ सकेंगे।

प्रदर्शनी और तकनीकी चर्चा का आयोजन
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​प्रदर्शनी और तकनीकी चर्चा का आयोजन​

मंत्री ने बताया कि काजू मेले के दौरान काजू से जुड़े विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा संगोष्ठियों और तकनीकी परिचर्चाओं का भी आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञ किसानों को नई तकनीक, बेहतर किस्मों और आधुनिक प्रसंस्करण तरीकों की जानकारी देंगे, जिससे उत्पादकता में सुधार हो सके।

मूल्यवर्धन और वैज्ञानिक मूल्य निर्धारण पर जोर
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​मूल्यवर्धन और वैज्ञानिक मूल्य निर्धारण पर जोर​

खांडरे ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि काजू में मूल्यवर्धन को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि सरकार काजू किसानों के लिए वैज्ञानिक तरीके से मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएगी। साथ ही अनुसंधान, नई तकनीक और उत्पादन बढ़ाने में किसानों को सहयोग दिया जाएगा।

सालाना 40 हजार टन काजू उत्पादन
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​सालाना 40 हजार टन काजू उत्पादन​

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कर्नाटक काजू विकास निगम की चेयरपर्सन ममता गट्टी ने बताया कि दक्षिण कन्नड़ जिला सालाना करीब 40,000 टन काजू का उत्पादन करता है। इस काजू की उपभोक्ताओं और काजू उद्योग में जबरदस्त मांग है। उन्होंने कहा कि निगम की योजना खासकर ग्रामीण इलाकों में काजू के पौधों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नई योजनाएं तैयार करने की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान काजू की खेती से जुड़ सकें।

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