रेलवे ने बर्थ सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, वेटिंग टिकट वालों के लिए बड़ी राहत

यदि आप भी ट्रेन से सफर करते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऑन-बोर्ड स्टाफ के लिए आरक्षित बर्थ प्रणाली में अहम परिवर्तन किया है। रेलवे ने बर्थ सिस्टम को लेकर 2016 और 2018 में जारी किए गए सर्कुलर को रद्द कर दिया है।

Authored by: Pradeep PandeyUpdated Feb 16 2026, 05:56 IST
पुराने सर्कुलर रद्द, नई व्यवस्था तुरंत लागूImage Credit : Canva01 / 08

पुराने सर्कुलर रद्द, नई व्यवस्था तुरंत लागू

रेलवे बोर्ड के ताजा निर्देशों के मुताबिक अब एसी फर्स्ट और एसी सेकेंड क्लास में स्टाफ के नाम पर ब्लॉक की जाने वाली सीटें सामान्य यात्रियों को उपलब्ध कराई जाएंगी।रेलवे ने साल 2016 और 2018 में जारी सभी पुराने आदेश निरस्त कर दिए हैं। नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सीटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

पहले क्या था प्रावधान?Image Credit : Canva02 / 08

पहले क्या था प्रावधान?

अब तक लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी कोच के प्रवेश द्वार के पास या बीच की कुछ बर्थ सफाईकर्मियों, एसी मैकेनिक और वेंडिंग स्टाफ जैसे ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखी जाती थीं। इससे रेलवे को किराए का नुकसान होता था और कई बार इन सीटों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आती थीं।

अब लागू हुई नई व्यवस्थाImage Credit : Canva03 / 08

अब लागू हुई नई व्यवस्था

नई प्रणाली के तहत एसी फर्स्ट और एसी सेकेंड क्लास में स्टाफ के लिए कोई भी बर्थ आरक्षित नहीं रहेगी। पूरी एसी ट्रेन में कर्मचारियों को केवल थर्ड एसी में अधिकतम दो सीटें दी जाएंगी।

घटेगी वेटिंग लिस्टImage Credit : Canva04 / 08

घटेगी वेटिंग लिस्ट

यदि किसी ट्रेन में स्लीपर कोच मौजूद है, तो एसी मेंटेनेंस स्टाफ को स्लीपर क्लास में स्थानांतरित किया जाएगा। इस बदलाव के बाद प्रत्येक ट्रेन में औसतन चार से छह अतिरिक्त प्रीमियम सीटें यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इससे वेटिंग लिस्ट घटने और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हाउसकीपिंग स्टाफ के लिए ‘स्प्रेड मॉडल’ लागूImage Credit : Canva05 / 08

हाउसकीपिंग स्टाफ के लिए ‘स्प्रेड मॉडल’ लागू

ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) के लिए अब ‘स्प्रेड मॉडल’ अपनाया गया है। इसके तहत कर्मचारियों को एक ही कोच में रखने के बजाय अलग-अलग कोचों में साइड लोअर बर्थ आवंटित की जाएगी। कोचों के बीच न्यूनतम दूरी का ध्यान रखा जाएगा, ताकि पूरे रेक में सफाई व्यवस्था की प्रभावी निगरानी हो सके।

वेंडिंग स्टाफ के लिए सख्त दिशा-निर्देशImage Credit : Canva06 / 08

वेंडिंग स्टाफ के लिए सख्त दिशा-निर्देश

खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडिंग स्टाफ के लिए नियम और कड़े किए गए हैं। जिन ट्रेनों में पेंट्री कार उपलब्ध है, वहां वेंडिंग स्टाफ को यात्री कोच में कोई सीट नहीं मिलेगी और उन्हें पेंट्री कार में ही रहना होगा। वहीं जिन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं है, वहां उन्हें स्लीपर क्लास में अधिकतम दो बर्थ दी जाएंगी।

यात्रियों को क्या होगा लाभ?Image Credit : Canva07 / 08

यात्रियों को क्या होगा लाभ?

इस निर्णय से वेटिंग लिस्ट कम होने की संभावना बढ़ेगी और प्रीमियम कोचों में कंफर्म सीट मिलने के अवसर अधिक होंगे। सीटों का बेहतर प्रबंधन होगा और रेलवे के राजस्व में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

संसाधनों का उपयोगImage Credit : Canva08 / 08

संसाधनों का उपयोग

रेलवे का लक्ष्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए पारदर्शिता बनाए रखना और यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करना है।​

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