आमतौर पर एक घरेलू RO सिस्टम 1 लीटर पीने योग्य पानी तैयार करने के लिए करीब 2 से 3 लीटर तक पानी बर्बाद कर देता है यानी कुल मिलाकर 3 से 4 लीटर पानी इस्तेमाल होता है, जिसमें से सिर्फ 1 लीटर ही पीने के काम आता है।
कुछ पुराने या कम गुणवत्ता वाले RO सिस्टम में यह अनुपात और भी खराब हो सकता है, जहां 1 लीटर शुद्ध पानी के लिए 4 से 5 लीटर तक पानी वेस्ट हो जाता है।
RO तकनीक में पानी को एक विशेष मेम्ब्रेन (झिल्ली) से गुजारा जाता है, जो अशुद्धियों को रोककर साफ पानी अलग करती है। इस प्रक्रिया में जो गंदगी और अशुद्धियां निकलती हैं, उन्हें बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि RO सिस्टम में “वेस्ट वाटर” निकलता है, जिसे आमतौर पर लोग बेकार समझकर बहा देते हैं।
भारत जैसे देश में, जहां पहले से ही पानी की कमी एक गंभीर मुद्दा है, RO से होने वाली पानी की बर्बादी चिंता बढ़ा रही है। अगर हर घर में RO सिस्टम का उपयोग होता है और पानी इसी तरह बहाया जाता है, तो यह लाखों लीटर पानी की बर्बादी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन इलाकों में पानी पहले से ही साफ है, वहां RO का इस्तेमाल जरूरी नहीं है।
हर जगह RO लगाना जरूरी नहीं होता। अगर आपके इलाके का पानी TDS (Total Dissolved Solids) के हिसाब से सुरक्षित है, तो UV या UF फिल्टर भी पर्याप्त हो सकते हैं। RO सिस्टम खासतौर पर उन जगहों के लिए उपयोगी है, जहां पानी में घुलित अशुद्धियां अधिक होती हैं।
RO से निकलने वाला पानी पूरी तरह बेकार नहीं होता। इसे कई घरेलू कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे- फर्श पोछने में, बर्तन धोने में, कपड़े साफ करने में, पौधों को पानी देने में आदि में। इससे पानी की बर्बादी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अब बाजार में ऐसे एडवांस RO सिस्टम भी आ रहे हैं, जो कम पानी बर्बाद करते हैं। कुछ मॉडल्स में 1:1 या 1:2 का अनुपात देखने को मिलता है, यानी जितना पानी शुद्ध होता है, लगभग उतना ही पानी वेस्ट होता है। इसके अलावा, कुछ कंपनियां “Zero Water Wastage” तकनीक का दावा भी कर रही हैं, हालांकि यह पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है।
RO का इस्तेमाल करते समय यह समझना जरूरी है कि पानी एक सीमित संसाधन है। सही तकनीक का चयन और वेस्ट पानी का पुनः उपयोग करके हम इस बर्बादी को कम कर सकते हैं।