टूटे घर खाली गलियां, 64 साल से खाली पड़ा है ये गांव, तुम जा सकते हो घूमने

अगर आपके लिए यात्रा का मतलब सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह घूमना-फिरना नहीं है तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है। रोमांच की चाह अगर आप घूमने पर मजबूर करती है तो इस बार उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा मार्तोली (Martoli) गांव आपका इंतजार कर रहा है।

Authored by: प्रभात शर्माUpdated May 20 2026, 08:57 IST
​रोमांचक यात्रा​Image Credit : Instagram01 / 08

​रोमांचक यात्रा​

रोमांच की तलाश में इस बार आप ऊंची पहाड़ियों के बीच बसे उत्तराखंड के अनोखे गांव की यात्रा कर सकते हैं। इस गांव के बारे में बेहद कम लोग जानते हैं जो आज एक अजीब-सी खामोशी में डूबा हुआ है।

​मार्तोली गांव​Image Credit : Instagram02 / 08

​मार्तोली गांव​

उत्तराखंड के जोहार वैली की गहराई में छुपा मार्तोली गांव मौजूदा समय में लगभग भुला दिया गया है। टूटे-फूटे पत्थर के घर, खाली गलियां और ढही हुई दीवारें आज इस गांव की पहचान है जहां पहले कभी रौनक हुआ करती थी।

​शानदार नजारा​Image Credit : Instagram03 / 08

​शानदार नजारा​

हिमालय की गोद में बसे मार्तोली गांव के चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे हिमालयी पहाड़ हैं। यहां खड़े होकर ऐसा लगता है मानो पूरा हिमालय आपको चारों तरफ से गले लगा रहा हो। नंदा देवी जैसी विशाल चोटियों का अद्भुत दृश्य यहां से साफ नजर आता है।

​गांव का इतिहास​Image Credit : Instagram04 / 08

​गांव का इतिहास​

ये गांव भले ही आज सुनसान हो, लेकिन पहले के टाइम में यह एक अहम व्यापारिक रास्ता हुआ करता था। यहां के लोग तिब्बत तक व्यापार करते थे। नमक, ऊन, मसाले, कपड़े और अनाज का आदान-प्रदान होता था।

​1962 का बड़ा बदलाव​Image Credit : Instagram05 / 08

​1962 का बड़ा बदलाव​

मार्तोली की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टूटने के पीछे की वजह साल 1962 में भारत-चीन युद्ध है। युद्ध के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। सीमा बंद हो गई और तिब्बत से होने वाला पुराना व्यापार रुक गया।

​धीरे-धीरे खाली होता गांव​Image Credit : Instagram06 / 08

​धीरे-धीरे खाली होता गांव​

रोजगार और व्यापार के खत्म होने के अलावा ठंडी सर्दियां, मुश्किल जीवन और अकेलापन इन सबने मिलकर यहां के लोगों को गांव छोड़ने पर मजबूर किया। धीरे-धीरे पूरा गांव खाली हो गया और वहां सन्नाटा पसर गया।

​आज की स्थिति​Image Credit : Instagram07 / 08

​आज की स्थिति​

खंडहर के बीच अभी भी उम्मीद बाकी है। मौजूदा समय में इस गांव में ज्यादा लोग नहीं रहते लेकिन, कुछ लोग गर्मियों में यहां लौटते हैं। अब आसपास कच्ची सड़कें बन गई हैं और पहुंच आसान हो गई है।

​रहस्यमयी डेस्टिनेशन​Image Credit : Instagram08 / 08

​रहस्यमयी डेस्टिनेशन​

ट्रेकर्स के लिए यह एक रहस्यमयी डेस्टिनेशन है। नंदा देवी बेस कैंप जाने वाले रास्ते पर आज भी कुछ ट्रेकर्स यहां आते हैं। यहां एक छोटा सा गेस्टहाउस भी बन गया है। यह गांव आज जिंदा और भूला हुआ दोनों के बीच कहीं अटका हुआ है।

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