व्हाइट बॉल क्रिकेट की बात करें तो रोहित शर्मा भारत के दूसरे सबसे सफल कप्तान हैं। रोहित की कप्तानी में भारत ने साल 2024 में दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाई जबकि 2025 में बिना एक भी मुकाबला गंवा उन्होंने टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफी भी जितवाया, लेकिन इन सब के बावजूद उनके करियर में 5 ऐसे दाग हैं जिन्हें वह कभी भूल नहीं पाएंगे। चलिए जानते हैं उनके करियर के 5 दाग कौन-कौन से हैं?
रोहित शर्मा के करियर का सबसे बड़ा दाग घर पर क्लीन स्वीप झेलने का है। न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैच की टेस्ट सीरीज में रोहित एंड कंपनी को क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। यह पहली बार था जब टीम इंडिया को घर पर क्लीन स्वीप झेलनी पड़ी। न्यूजीलैंड ने यह टेस्ट सीरीज 3-0 से अपने नाम किया था। यह हार रोहित के करियर की सबसे बड़े दागों में से एक है।
घर पर हारना किसी भी टीम को पसंद नहीं। होम एडवांटेज के कारण आपको घर पर जीत मिलने में पिच का सपोर्ट होता है। इसके बावजूद रोहित के नाम घर पर सबसे ज्यादा टेस्ट हारने का अनचाहा रिकॉर्ड है। उन्हें घर पर 5 टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा। न्यूजीलैंड के खिलाफ क्लीन स्वीप के अलावा भारत को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
रोहित के पास तीसरी आईसीसी ट्रॉफी जीतकर एमएस धोनी के रिकॉर्ड की बराबरी करने का सुनहरा मौका था, लेकिन वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में चूक गए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे WTC फाइनल में टीम इंडिया को रोहित की कप्तानी में 209 रन से हार का सामना करना पड़ा। दोनों पारी में वह केवल 58 रन ही बना पाए और एक और आईसीसी ट्रॉफी जीतने का मौका गंवा दिया।
रोहित की कप्तानी करियर में एक ऐसा भी साल रहा जब एक कैलेंडर ईयर में उनके नाम एक भी जीत नहीं थी। साल 2024 में टीम एक भी मुकाबला जीत नहीं पाई। इस कैलेंडर ईयर में टीम केवल 3 मैच खेली थी। श्रीलंका के खिलाफ 3 मैच की सीरीज में उसे 0-2 से हार का सामना करना पड़ा था।
रोहित के करियर में 5वां दाग ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे बड़ी हार का भी है।विशाखापट्टनम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में टीम इंडिया 117 रन पर सिमट गई थी और ऑस्ट्रेलिया ने जरूरी रन केवल 11 ओवर में बना लिए थे। ऑस्ट्रेलिया ने 234 गेंद शेष रहते ये जीत हासिल की थी जो भारत की सबसे बड़ी हार थी।
कप्तान के तौर पर रोहित शर्मा के क्रिकेट करियर पर भले ही विराम लग गया हो, लेकिन खिलाड़ी के तौर पर उनके पास एक और आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम करने का मौका है। केवल एक फॉर्मेट खेलने वाले रोहित की कोशिश होगी कि साल 2027 में 2023 की कमी को पूरा कर लिया जाए, हालांकि, इसके लिए उन्हें तब तब लगातार फॉर्म में रहना होगा।