वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा इस तरह होना चाहिए कि उसमें सभी दिशाओं का संतुलन बना रहे और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से हो।
घर का मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
लिविंग रूम उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। इससे घर में आने वाले मेहमानों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और सकारात्मक माहौल बना रहता है।
किचन दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में होना सबसे अच्छा माना जाता है। खाना बनाते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य और ऊर्जा अच्छी रहती है।
पूजा घर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में बनाना सबसे शुभ होता है। यह घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इससे स्थिरता और पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं। सोते समय सिर दक्षिण दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
बाथरूम और टॉयलेट उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होने चाहिए। इन्हें कभी भी पूजा घर या किचन के पास नहीं बनाना चाहिए।