वास्तु शास्त्र का काफी ज्यादा महत्व है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वास्तु के अनुसार किए गए काम, मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक सुख को बढ़ावा देते हैं। जबकि गलत वास्तु से तनाव, बाधा और असंतुलन पैदा होती है। वास्तु के बिना तो घर भी नहीं बनते हैं, ऐसे में यात्रा से जुड़े वास्तु के नियम जान लेना बेहद जरूरी है। यहां से आप यात्रा से जुड़े वास्तु के नियम जान सकते हैं।
घर से निकलते समय दाहिना पैर पहले रखें। वास्तु और शास्त्रों में दाहिना पक्ष सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जब आप दाहिना पैर पहले रखते हैं, तो यह संकेत देता है कि यात्रा शुभ उद्देश्य और अच्छे परिणामों के साथ शुरू हो रही है। इससे मानसिक आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
घर से खाली हाथ निकलने से बचें। वास्तु में खाली हाथ घर से निकलना अशुभ माना जाता है। यात्रा पर निकलते समय पर्स, मोबाइल, चाबी या पानी की बोतल साथ रखने से यह दर्शाता है कि आप पूर्णता और सुरक्षा के साथ बाहर जा रहे हैं।
यात्रा के दिन शुभ मुहूर्त और वार का ध्यान रखें। मंगलवार और शनिवार को यात्रा करते समय थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। इन दिनों हनुमान चालीसा का पाठ या ॐ नमः शिवाय का जाप करने से यात्रा सुरक्षित और बाधारहित रहती है।
घर से निकलते समय पीछे मुड़कर न देखें। वास्तु मान्यता के अनुसार बार-बार पीछे देखने से मन में कंफ्यूजन और अनिश्चितता पैदा होती है, जो यात्रा में देरी या रुकावट का कारण बन सकती है। घर से निकलते समय एकाग्र मन से आगे बढ़ना चाहिए।
यात्रा से पहले ईश्वर का स्मरण करें। घर से निकलने से पहले गणेश जी, हनुमान जी या अपने इष्ट देव का नाम लेने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। विशेष रूप से गणेश जी को विघ्नहर्ता माना गया है, इसलिए उनका स्मरण यात्रा के दौरान आने वाली रुकावटों को कम करता है।
उत्तर या पूर्व दिशा से यात्रा प्रारंभ करना होता है शुभ। वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा सूर्य और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा कुबेर से जुड़ी है जो समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है। यदि संभव हो तो यात्रा की शुरुआत इन दिशाओं से करना अत्यंत शुभ माना जाता है।