वास्तु शास्त्र के अनुसार फर्नीचर केवल घर की सुंदरता बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह घर के ऊर्जा प्रवाह को भी प्रभावित करता है। इसलिए फर्नीचर के लिए लकड़ी खरीदते समय, उसे घर में लाते समय और घर के भीतर उसकी दिशा तथा स्थान निर्धारित करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि इन वास्तु नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो न केवल घर की सजावट निखरती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य भी बढ़ता है। आइए फर्नीचर से जुड़े उन महत्वपूर्ण वास्तु नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जो आपके घर को सुंदर और शुभ बनाने में सहायक हो सकते हैं।
ड्रॉइंग रूम में सोफा दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार से लगाकर रखें। बैठते समय चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना अच्छा माना जाता है। भारी फर्नीचर दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना शुभ होता है।
बेडरूम में बेड ऐसा रखें कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की तरफ रहे। बेड को सीधे दरवाज़े के सामने न रखें। बेड के ऊपर भारी बीम न हो।
भारी अलमारी या तिजोरी दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें। तिजोरी का दरवाजा उत्तर दिशा की ओर खुलना अच्छा माना जाता है।
डाइनिंग टेबल पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना अच्छा रहता है। खाते समय परिवार का चेहरा पूर्व या उत्तर की तरफ होना बेहतर माना जाता है।
स्टडी टेबल पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। पढ़ते समय चेहरा पूर्व या उत्तर की तरफ होना चाहिए, इससे एकाग्रता बढ़ती है।
आईना उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाना अच्छा माना जाता है। बेड के सामने आईना लगाने से बचें। साथ ही घर में फर्नीचर बहुत ज़्यादा ठूंसकर न रखें, खुली जगह रहने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है।