क्रिटिकल मिनरल्स के पीछे क्यों भाग रही दुनिया? चीन के खिलाफ भारत-US सहित 50 देशों ने खोला मोर्चा

What are critical minerals and Where are the used: तकनीकी के दबदबे वाली दुनिया में आगे वही देश तेजी से तरक्की कर पाएगा जिनके पास दुर्लभ खनिज तत्वों (Critical Minerals) तक अबाध और निर्बाध पहुंच होगी। दुर्लभ खनिज तत्वों का इस्तेमाल और इनकी मांग तकनीक क्षेत्र में काफी बढ़ गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), मोबाइल फोन, लैपटॉप, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज, मेडिकल, रक्षा और एयरस्पेस में काफी हो रहा है। खास बात यह है कि बाकी चीजों की तरह क्रिटिकल मिनरल्स उपलब्धत नहीं है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर है चीन का दबदबा
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क्रिटिकल मिनरल्स पर है चीन का दबदबा

विश्व में कुछ ही देशों के पास ये खनिज तत्व पाए जाते हैं। दुनिया के करीब 60 प्रतिशत क्रिटिकल मिनरल्स का खनन चीन करता है और दुनिया भर में आपूर्ति होने वाले 90 प्रतिशत दुर्लभ खनिज तत्वों को रिफाइन (प्रोसेस) वही करता है। अर्थ मैग्नेट भी चीन के पास प्रचुर मात्रा में हैं। तकनीक और रक्षा खासकर स्टील्थ टेक्नॉलजी में अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल होता है।

आपूर्ति श्रृंखला बाधित कर सकता है चीन
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आपूर्ति श्रृंखला बाधित कर सकता है चीन

दुर्लभ खनिज तत्वों पर चीन के इस एकाधिकार एवं दबदबे को दुनिया के देश ठीक नहीं मान रहे। देशों को लगता है कि जब तक चीन के साथ रिश्ते ठीक हैं तब तो ठीक है लेकिन जिस दिन उससे रिश्ते बिगड़े उस समय क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को वह बाधित कर सकता है। जैसे कि उसने टैरिफ लगने के बाद यूएस को दुर्लभ खनिज तत्वों की आपूर्ति रोक दी थी।

चीन के खिलाफ एकजुट हो रहे देश
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चीन के खिलाफ एकजुट हो रहे देश

वाशिंगटन में 4 फरवरी को हो रही क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टिरियल की बैठक का यही उद्देश्य है। इस बैठक में शामिल होने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर वाशिंगटन में है। इस सम्मेलन में अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, भारत, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अर्जेंटीन के विदेश मंत्री एवं प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

अगली बैठक मुंबई में होगी
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अगली बैठक मुंबई में होगी

क्रिटिकल मिनरल्स पर अगली बैठक फरवरी में ही मुंबई में होनी है। इसी तरह की अन्य बैठकें दुनिया के अलग-अलग हिस्से में होनी है। दुर्लभ खनिज तत्वों पर चीन पर निर्भरता कम करने के लिए यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। देश चाहते हैं कि दुर्लभ खनिज तत्वों पर चीन का विकल्प तैयार हो। इस बैठक में अफ्रीका के कई देशों को भी आमंत्रित किया गया है।

अफ्रीकी देशों के पास भी दुर्लभ खनिज तत्व
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​अफ्रीकी देशों के पास भी दुर्लभ खनिज तत्व​

अफ्रीका में भी दुर्लभ खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। दुनिया का 55 प्रतिशत कोबाल्ट, 47.7 प्रतिशत मैंगनीज और करीब 21.6 प्रतिशत ग्रेफाइट अफ्रीका में मिलता है। कांगो, दक्षिण अफ्रीका और जाम्बिया में ये दुर्लभ खनिज तत्वों की अधिकता है।

इनमें होता है क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल
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इनमें होता है क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल

डिफेंस सेक्टर में मिसाइल, रडार, फाइटर जेट और नेवी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट्स चीन की सप्लाई पर टिके हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा टर्बाइन, स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर उद्योग में भी चीन की भूमिका निर्णायक है।

वैकल्पिक सप्लाई चेन चाहते हैं देश
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वैकल्पिक सप्लाई चेन चाहते हैं देश

हाल के वर्षों में चीन ने निर्यात नियंत्रण और कोटा जैसे कदम उठाकर यह साफ कर दिया है कि रेयर अर्थ तत्व उसके लिए केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार भी हैं। इसी कारण दुनिया के कई देश वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने में जुटे हैं।

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