अकेले किसी भी मिशन पर क्यों नहीं जाता है बॉम्बर प्लेन? हमेशा घेरे रहते हैं फाइटर जेट्स

बॉम्बर प्लेन किसी भी युद्ध में दुश्मन पर बमबारी करने में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं, विश्व युद्ध से लेकर हाल के ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले तक में, यूक्रेन के अंदर रूस तक के हमले में बॉम्बर प्लेन अपना जलवा बिखेर चुके हैं। लेकिन जरा ये सोचिए कि बॉम्बर प्लेन कभी अकेले क्यों नहीं मिशन पर जाते हैं। हमेशा फाइटज जेट से लैस क्यों होते हैं? क्यों वो अकेले किसी मिशन को अंजाम देकर वापस नहीं लौट सकते?

बॉम्बर प्लेन अकेले क्यों नहीं उड़ान भरते
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बॉम्बर प्लेन अकेले क्यों नहीं उड़ान भरते?

बॉम्बर प्लेन हमेशा मिशन के दौरान अपने सुरक्षा दस्ते के साथ होते हैं, उनके आगे-पीछे खतरनाक लड़ाकू विमान होते हैं, जो उन्हें एस्कॉर्ट करके चलते हैं। ऐसा समझिए कि कोई VVIP चल रहा है और पुलिस उसे सुरक्षा दे रहा है, एस्कॉर्ट कर रही है। ऐसा ही बॉम्बर के साथ होता है। दरअसल बॉम्बर दुश्मन के लिए काफी खतरनाक होता है, इसलिए दुश्मन के फाइटर जेट, उसे गिराने के लिए लगे होते हैं, जिनसे बॉम्बर बच नहीं सकता है, इसलिए उसे बचाने के लिए फाइटर जेट के एस्कॉर्ट की जरूरत पड़ती है।

 बॉम्बर प्लेन को किससे और कैसे बचाते हैं फाइटर जेट
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बॉम्बर प्लेन को किससे और कैसे बचाते हैं फाइटर जेट?

फाइटर जेट बॉम्बर की मदद सीधे युद्ध में ढाल बनकर करते हैं। बॉम्बर बड़े और भारी होते हैं। उनकी स्पीड और फुर्ती कम होती है, इसलिए दुश्मन के फाइटर जेट उन्हें आसानी से निशाना बना सकते हैं। दुश्मन के इलाके में मिसाइल और एयर डिफेंस होते हैं। फाइटर और सपोर्ट एयरक्राफ्ट मिलकर इन खतरों की पहचान करके उसे नष्ट कर देते हैं। फाइटर जेट: दुश्मन के रडार को जाम करते हैं, झूठे सिग्नल भेजते हैं, मिसाइलों को भटकाते हैं, जिससे बॉम्बर की पहचान मुश्किल हो जाती है।

आसमान में कब अकेले दिखते हैं बॉम्बर प्लेन
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आसमान में कब अकेले दिखते हैं बॉम्बर प्लेन?

आसमान में बॉम्बर प्लेन दो मौके पर अकेल दिखते हैं। पहला जब कोई शो हो या ट्रेनिंग हो तब। यानि कि किसी भी मिशन के दौरान वो अकेले नहीं होते हैं।

कौन सा बॉम्बर अकेले मिशन को अंजाम दे सकता है
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कौन सा बॉम्बर अकेले मिशन को अंजाम दे सकता है?

आज की तारीख में दुनिया में सिर्फ एक बॉम्बर है, जो अमेरिका के पास है। अमेरिका का B2 बॉम्बर अकेले मिशन को अंजाम दे सकता है, क्योंकि ये स्टेल्थ है, जिसे दुश्मन के लिए पकड़ना एक तरह से नामुमकिन है। हालांकि अभीतक इसने भी फॉर्मेशन में ही मिशन को अंजाम दिया है।

किन-किन युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं बमबर्षक विमान
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किन-किन युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं बमबर्षक विमान

बमवर्षक विमानों ने कई बड़े युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाई है और कई बार युद्ध की दिशा ही बदल दी। दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और जापान सभी ने रणनीतिक बमवर्षक विमानों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। ब्रिटेन और अमेरिका ने जर्मनी के औद्योगिक शहरों, फैक्ट्रियों और तेल रिफाइनरियों पर लगातार बमबारी कर उसकी युद्ध क्षमता तोड़ दी, जबकि अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर किए गए परमाणु हमलों ने जापान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया और युद्ध का अंत तय हो गया।

खाड़ी से लेकर अफगानिस्तान तक में बरपा चुके हैं कहर
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खाड़ी से लेकर अफगानिस्तान तक में बरपा चुके हैं कहर

1991 के खाड़ी युद्ध में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं ने अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों से इराक के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटरों और हथियार भंडारों को नष्ट कर दिया। शुरुआती हवाई हमलों ने ही इराकी सेना की कमर तोड़ दी और जमीनी युद्ध को आसान बना दिया। अफगानिस्तान युद्ध में लंबी दूरी तक मार करने वाले बमवर्षक विमानों ने पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और सीमित जमीनी मौजूदगी के बावजूद दुश्मन पर प्रभावी दबाव बनाए रखा। इसी तरह बाल्कन युद्धों और लीबिया संघर्ष में भी नाटो के बमवर्षक और लड़ाकू-बमवर्षक विमानों ने दुश्मन की सैन्य क्षमता को कमजोर कर संघर्ष के नतीजे को प्रभावित किया।

बॉम्बर प्लेन ने बर्बाद कर दिया था नॉर्थ कोरिया को
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बॉम्बर प्लेन ने बर्बाद कर दिया था नॉर्थ कोरिया को

कोरियाई युद्ध में अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने उत्तर कोरिया की सप्लाई लाइनों, पुलों और सैन्य ठिकानों को नष्ट कर उसकी आगे बढ़ने की क्षमता को सीमित कर दिया। वियतनाम युद्ध में बी-52 जैसे भारी बमवर्षक विमानों ने बड़े पैमाने पर बमबारी कर दुश्मन पर जबरदस्त दबाव बनाया, जिससे युद्ध की रणनीति और बातचीत की दिशा प्रभावित हुई।

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