पटाखों की राजधानी है भारत का ये शहर; जापान से क्या है इसका नाता?

भारत के बारे में एक मशहूर कहावत है 'कोस-कोस पर बदले पानी चार कोस पर बानी' मतलब यह कि यहां हर एक कोस पर पानी का स्वाद बदल जाता है और हर चार कोस पर भाषा। हर राज्य-हर शहर की अपनी खास पहचान और खासियतें हैं। जहां यूपी-एमपी जैसे प्रदेशों में हिंदी बोली जाती है तो वहीं दक्षिण के राज्यों की अपनी भाषा है। कल्चर और खान-पान का भी यही हाल है। इन खासियतों प्राकृतिक सुंदरताओं के आधार पर शहर और राज्यों को अलग-अलग निकनेम भी दिए गए हैं। ऐसे ही भारत के एक शहर को 'मिनी जापान' कहा जाता है। मिनी जापान कहा जाने वाला ये शहर कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं है, बल्कि उसे ये नाम औद्योगिक अनुशासन, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन और एमएसएमई के काम करने के तरीकों के चलते मिला है।

बताएंगे ऐसी बातें जो शायद ही पता हों
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बताएंगे ऐसी बातें जो शायद ही पता हों

15वीं शताब्दी में पांड्य राजाओं द्वारा बसाया गया एक शहर आज मिनी जापान के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां न तो घूमने के लिए कोई हिल स्टेशन है और न ही कोई समुद्र का बीच, फिर भी इसे ये नाम क्यों दिया गया है, पक्का आपको नहीं पता होगा। आज हम आपको इस सवाल का जवाब तो देंगे ही, साथ ही कई ऐसी बातें भी बताएंगे जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो...

किस राज्य में है ये शहर और क्या है इसका नाम
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किस राज्य में है ये शहर और क्या है इसका नाम​

भारत का 'मिनी जापान' कहा जाने वाला शहर तमिलनाडु में स्थित है और इसका नाम 'शिवकाशी'है। दक्षिण भारत का राज्य तमिलनाडु पर्यटन के लिए बेहद मशहूर है, लेकिन शिवकाशी में कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं है फिर भी इसकी तुलना जापान से होती है। 'शिवकाशी'को लोकल भाषा में 'कुट्टी जापान'भी कहते हैं।

ऐसे पड़ा था शिवकाशी नाम
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ऐसे पड़ा था शिवकाशी नाम

शिवकाशी का इतिहास 600 वर्ष से भी अधिक पुराना है और इसका नाम एक पौराणिक घटना से जुड़ा है। 15वीं सदी में मदुरै के राजा हरीकेसरी परक्कीरामा पांडियन काशी से शिवलिंग लाए थे, लेकिन रास्ते में एक स्थान पर गाय के रुक जाने से शिवलिंग वहीं स्थापित कर दिया गया। मान्यता है कि काशी से लाए गए शिवलिंग के कारण यह स्थान पवित्र हुआ और तभी से इसका नाम शिवकाशी पड़ गया। यह शहर अय्या नादर और शन्मुगा नादर जैसे उद्यमियों के प्रयासों के कारण एक छोटे से गांव से एक समृद्ध औद्योगिक शहर में विकसित हुआ। यहां का प्रमुख स्थल भद्रकाली अम्मन मंदिर है।

किसने दिया था कुट्टी जापान नाम
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किसने दिया था 'कुट्टी जापान' नाम

इसे यह नाम भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिया था। तमिल भाषा में कुट्टी का अर्थ छोटा होता है। इसीलिए कुट्टी जापान को मिनी जापान हो गया। इसके अलावा, यह शहर 'फायरक्रैकर कैपिटल ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है।

इस शहर में ऐसा क्या खास कि मिनी जापान की मिल गई उपमा
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​इस शहर में ऐसा क्या खास कि मिनी जापान की मिल गई उपमा

शिवकाशी के लिए यह नाम सिर्फ उपमा भर नहीं है, बल्कि यहां के लोगों ने कड़ी मेहनत और छोटे-छोटे उद्योंगो को बेहद सुसंगठित और कुशलता से चलाकर यह गौरव हासिल किया है। यहां के उद्योंगो को चलाने का तरीका जापान की औद्योगिक संस्कृति से मेल खाता है।

दुनिया भर में जाते हैं यहां बने पटाखे
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​दुनिया भर में जाते हैं यहां बने पटाखे

मदुरै से 74 किमी की दूरी पर स्थित शिवकाशी,भारत के पटाखा,माचिस और प्रिंटिंग (छपाई) उद्योग का केंद्र है। यह देश के कुल पटाखा उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा उत्पादित करता है। यहां के उद्योगों में 7,00,000 से अधिक लोग काम करते हैं।

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