समुद्र में चलने वाले बड़े कार्गो जहाज, ऑयल टैंकर और कंटेनर शिप आम वाहनों की तरह पेट्रोल या साधारण डीज़ल से नहीं चलते। इन विशाल जहाजों के लिए खास तरह का ईंधन इस्तेमाल किया जाता है, जिसे बंकर फ्यूल कहा जाता है। यह भारी और गाढ़ा तेल होता है, जो बड़े जहाजों के शक्तिशाली इंजनों को लंबे समय तक चलाने में मदद करता है।
दुनिया के ज्यादातर बड़े जहाज हेवी फ्यूल ऑयल (Heavy Fuel Oil) से चलते हैं। यह कच्चे तेल को रिफाइन करने के बाद बचा हुआ गाढ़ा तेल होता है। चूंकि इसकी कीमत अन्य ईंधनों की तुलना में कम होती है, इसलिए शिपिंग कंपनियां इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं।
शिपिंग इंडस्ट्री में इस ईंधन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ता होता है और बड़े इंजनों को ज्यादा ऊर्जा देता है। लंबे समुद्री सफर के दौरान जहाजों को भारी मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है, ऐसे में बंकर फ्यूल लागत कम रखने में मदद करता है।
दरअसल बंकर फ्यूल समुद्री जहाजों में इस्तेमाल होने वाला एक खास प्रकार का मरीन फ्यूल ऑयल है। जहाजों में जहां ईंधन रखा जाता था, उस हिस्से को पहले “बंकर” कहा जाता था, इसी वजह से इस ईंधन का नाम बंकर फ्यूल पड़ गया। आज भी जहाजों में ईंधन भरने की प्रक्रिया को बंकरिंग कहा जाता है।
हेवी फ्यूल ऑयल बेहद गाढ़ा और काले तार जैसा दिखाई देता है। इसकी गाढ़ी प्रकृति के कारण इसे सीधे इंजन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे पहले गर्म किया जाता है ताकि यह पतला होकर इंजन तक आसानी से पहुंच सके और जहाज के इंजन को पर्याप्त ऊर्जा दे सके।
हालांकि सभी जहाज केवल हेवी फ्यूल ऑयल से ही नहीं चलते। कई जहाजों में मरीन गैस ऑयल (MGO), मरीन डीजल ऑयल (MDO) और इंटरमीडिएट फ्यूल ऑयल (IFO) जैसे अन्य मरीन ईंधनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। जहाज का प्रकार, इंजन और पर्यावरण नियम तय करते हैं कि कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होगा।
हेवी फ्यूल ऑयल के इस्तेमाल को लेकर पर्यावरण को लेकर चिंता भी जताई जाती है। इस ईंधन से सल्फर और अन्य प्रदूषक गैसें ज्यादा निकलती हैं, जिससे समुद्री और वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिपिंग इंडस्ट्री को कम सल्फर वाले ईंधन की ओर बढ़ने के लिए कहा जा रहा है।