नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। पहले प्रोटोटाइप, फिर ट्रायल और उसके बाद सीरीज प्रोडक्शन होगा। इस पूरी प्रक्रिया में BEML और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई की अहम भूमिका रहेगी। ये ट्रेनें लंबी दूरी की यात्रा को पूरी तरह बदल देंगी, क्योंकि इनमें आधुनिक सुरक्षा और आराम की सुविधाएं जैसे- झटका-रहित सेमी-पर्मानेंट कपलर और एंटी-क्लाइंबर, कवच सिस्टम आदि की व्यवस्था है।
रेल मंत्रालय से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, पहले कुछ वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट ट्रायल के बाद जल्द सेवाओं में शामिल किए जाएंगे। इसके बाद मांग और ऑपरेशनल तैयारी के आधार पर इन्हें चरणों में अलग-अलग रूट्स पर उतारा जाएगा। यानी कह सकते हैं कि लॉन्च एक साथ नहीं बल्कि स्टेप-बाय-स्टेप होगी।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में इन नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-चेन्नई,मुंबई-हैदराबाद, हावड़ा-बेंगलुरु जैसे हाई-डिमांड, लंबी दूरी वाले रूट्स पर चलाया जा सकता है, जहां रात की स्लीपर ट्रेनों बेहद जरूरत महसूस की जा रही है।
ऑटोमेटिक प्लग दरवाजे और चौड़े गैंगवे, सभी कोच में CCTV, इमरजेंसी में पैसेंजर और ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से बात करने की सुविधा,हर कोच के अंत में फायर बैरियर दरवाजे आदि सुविधाओं से लैस है।
वंदे भारत स्लीपर में इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम है तो वहीं बेहतर फायर सेफ्टी और स्मार्ट मॉनिटरिंग की सुविधा भी है। वहीं इस ट्रेन में कवच सुरक्षा प्रणाली भी है जो मौजूदा स्लीपर ट्रेनों से इन्हें अलग बनाती हैं।
अभी वंदे भारत सिर्फ चेयर कार डे-ट्रेन के तौर पर जानी जाती थी पर अब स्लीपर वर्जन आने से लंबी दूरी, रात की यात्रा, तेज स्पीड और कम समयको एक साथ जोड़ने की तैयारी है।
वंदे भारत स्लीपर जो क्रैशवर्थी बॉडी के साथ है उसमें झटका-रहित सेमी-पर्मानेंट कपलर और एंटी-क्लाइंबर, कवच सिस्टम लगा हुआ है। 160 किमी प्रति घंटा ऑपरेटिंग स्पीड से यात्रा का समय घटेगा वहीं रात की लंबी दूरी वाली ट्रेनों का सीन ही बदल जाएगा।