खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह देश की ऊर्जा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। इसी वजह से इसे ईरान की “ऑयल लाइफलाइन” भी कहा जाता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेनाओं (CENTCOM) ने ईरान के महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप पर सबसे ताकतवर हवाई हमले किए हैं. उन्होंने साफ किया कि इस हमले में ईरानी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट किया गया, लेकिन तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखा गया.
ईरान के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से निर्यात किया जाता है। यहां विशाल तेल टर्मिनल और स्टोरेज टैंक बने हुए हैं। दुनिया के कई देशों के लिए जाने वाले तेल टैंकर यहीं से कच्चा तेल लेकर निकलते हैं।
ईरान के बड़े तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के जरिए तेल सीधे खार्ग आइलैंड तक पहुंचाया जाता है। यहां बड़े-बड़े टैंक में तेल स्टोर किया जाता है और फिर टैंकरों में लोड किया जाता है। यह नेटवर्क ईरान की तेल सप्लाई को लगातार बनाए रखने में मदद करता है।
खर्ग आइलैंड के आसपास समुद्र काफी गहरा है। इसी वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर यहां आसानी से आ सकते हैं। यह सुविधा इसे अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए बेहद अहम बनाती है।
ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर निर्भर है। खार्ग आइलैंड से होने वाला निर्यात देश की आय का बड़ा स्रोत है। इसलिए इस द्वीप को ईरान की आर्थिक रीढ़ भी कहा जाता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच खार्ग आइलैंड का महत्व और बढ़ गया है। अगर यहां कोई बड़ा हमला होता है तो ईरान के तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह जगह रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग आइलैंड की सप्लाई बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच सकती है। तेल की कीमतों में तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है। इसलिए पूरी दुनिया की नजर इस द्वीप पर बनी हुई है।