तो वायु सेना के लिए इस ग्रुप ने हाई प्रेसिजन मैन्यूफैक्चरिंग, टाइटेनियम, सुपर एलॉय फोर्जिंग और एयरो इंजन कंपोनेंट में भारी निवेश किया है। आगे कंपनी फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए हल्के ढांचे, यूएवी, मिसाइल एयरफ्रेम्स और यहां तक कि अमका जैसे अगली पीढ़ी के हथियारों के लिए नए उत्पाद बना सकती है।
नौसेना के लिए भी कल्याणी ग्रुप एक से बढ़कर हथियार और रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। कंपनी युद्धपोतों के लिए उपकरण एवं हथियार बना रही है। सेना के लिए बन रहे 50 प्रोडक्ट्स में फ्रिगेट, सबमरीन और अनमैंड सरफेस, अंडर वाटर वेहिकल निर्माण भी शामिल है।
बाबा कल्याणी का कहना है कि सेना के लिए 50 प्रोडक्ट बनाना केवल नंबर की बात नहीं है बल्कि रक्षा क्षेत्र उत्पादन की क्षमता में एक गहराई लाना और आयात की निर्भरता को कम करना है।
काउंटर इंसरजेंसी और बॉर्डर ऑपरेशन के लिए वाहन, अगली पीढ़ी के एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और जवानों के लिए उन्नत उपकरण बनाने की दिशा में भी कंपनी काम कर रही है।
ये उत्पाद भारतीय सेना को ज्यादा विश्वसनीय और कटिंग एज विकल्प देंगे। इन रक्षा उपकरणों एवं हथियारों की विश्वसनीयता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि प्रत्येक उत्पाद के पीछे डीआरडीओ का सहयोग, आर एंड डी और वर्षों का परीक्षण शामिल है।
कल्याणी ग्रुप पहले ही डीआरडीओ के साथ मिलकर एडवांस्ड टोड ऑर्टिलरी गन सिस्टम यानी एटीएजीएस बना चुका है। अब वह हल्का, तेजी से चलने वाले होवित्जर तोपों, आधुनिक आर्मर्ड वेहिकल, प्रेसिजन गाइडेड गोला बारूद बना रही है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों का आना जरूरी है। टाटा, अडानी ग्रुप, कल्याणी ग्रुप जैसी कंपनियां भारत सरकार के इसी सपने को आगे बढ़ा रही हैं। रक्षा क्षेत्र के ये स्वदेशी निजी और उन्नत हथियार विदेशी हथियार आयात को कम करने के साथ आत्मनिर्भर और मेक इन इंडिया पहलों को मजबूत बनाएंगे।