Photos: कितनी पावरफुल है ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल 'फतह-2'? ताकत जानकर इजरायल-अमेरिका भी हैरान-परेशान!

Israel Vs Iran: इजरायल-ईरान के बीच जंग जारी है। अमेरिका और इजरायल के हर हमलों का ईरान जबरदस्त जवाब दे रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों की मौत के बाद लगा कि ईरान कमजोर पड़ गया होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुई। ईरान की सैन्य ताकत देख दुनिया हैरान है। ईरान के हथियार जबरदस्त काम कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा ईरानी मिसाइल फतह-2 की हो रही है, जिसने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जबरदस्त तबाही मचाई है। आइए जानते हैं कि इस मिसाइल की खासियत क्या है।

Produced by: Piyush KumarUpdated Mar 3 2026, 15:13 IST
क्यों चर्चा में है ‘फतह-2’?​01 / 07

क्यों चर्चा में है ‘फतह-2’?​

इन हमलों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल Fattah-2 की हो रही है। बताया जा रहा है कि यह हाइपरसोनिक तकनीक से लैस मिसाइल अमेरिकी सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में इस्तेमाल की गई। ‘फतह’ का मतलब फारसी में ‘विजेता’ होता है, और यह मिसाइल अपनी गति और सटीकता के कारण ईरान की मिसाइल क्षमता का नया प्रतीक बनकर उभरी है।

​​हाइपरसोनिक तकनीक का असर​Image Credit : AP02 / 07

​​हाइपरसोनिक तकनीक का असर​

ईरान की नई बैलिस्टिक मिसाइल Fattah-2 को हाइपरसोनिक तकनीक से लैस बताया जा रहा है, जो इसे पारंपरिक मिसाइलों से अलग बनाती है। इसकी खासियत है अत्यधिक गति और हवा में मार्ग बदलने की क्षमता, जिससे इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल करती है, जो लक्ष्य की ओर घुमावदार और अप्रत्याशित रास्ता अपनाती है। इसी तकनीकी बढ़त ने इजरायल की रक्षा प्रणाली के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर बड़ा प्रभाव डाला है।

​​कैसे काम करती है मिसाइल?​iran ballistic missile fattah 2 makes iron dome failed iran vs israel Image Credit : AP03 / 07

​​कैसे काम करती है मिसाइल?​iran ballistic missile fattah 2 makes iron dome failed iran vs israel

फतह-2 एक बैलिस्टिक मिसाइल है। इसके अलावा ये हाइपरसॉनिक मिसाइल भी है। यह फायर होने के बाद सबसे पहले वायुमंडल में काफी ऊंचाई पर जाती हैं। इसे बूस्ट फेज कहा जाता है। वहां पहुंचने पर इनका बूस्टर बंद हो जाता है। इसके बाद ये अपने टारगेट की तरफ आना शुरू करती हैं, जिसे मिडकोर्स फेज कहा जाता है। फिर ये वापस से वायुमंडल में प्रवेश कर अपने टारगेट पर अटैक करती हैं।

​​कितना खास है यह मिसाइल?​Image Credit : AP04 / 07

​​कितना खास है यह मिसाइल?​

इन मिसाइल्स में पारंपरिक विस्फोटक के साथ-साथ न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की भी क्षमता होती है। इसीलिए बैलिस्टिक मिसाइल्स को आज की तारीख में काफी अहम माना जाता है। रेंज के आधार पर देखें तो बैलिस्टिक मिसाइल्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है।

​​इतनी खतरनाक क्यों?​Image Credit : AP05 / 07

​​इतनी खतरनाक क्यों?​

फतह-2 एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जिसकी गति मैक 5 या उससे अधिक हो सकती है। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तकनीक से लैस है, जिससे यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है। इतनी तेज गति पर दिशा बदलने की क्षमता इसे पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए बेहद कठिन लक्ष्य बना देती है। यही वजह है कि इसे मौजूदा जंग में “गेम चेंजर” के रूप में देखा जा रहा है।

​​बैलिस्टिक मिसाइल क्या होती है?​Image Credit : AP06 / 07

​​बैलिस्टिक मिसाइल क्या होती है?​

बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च होने के बाद पहले ऊंचाई पर जाती हैं, जिसे बूस्ट फेज कहा जाता है। इसके बाद वे मिडकोर्स फेज में लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं और अंत में टर्मिनल फेज में वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कर लक्ष्य पर हमला करती हैं। इन मिसाइलों में पारंपरिक विस्फोटक के साथ न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की भी क्षमता हो सकती है। रेंज के आधार पर इन्हें शॉर्ट, मीडियम, इंटरमीडिएट और लॉन्ग रेंज (ICBM) श्रेणियों में बांटा जाता है।

​​एयर डिफेंस सिस्टम क्यों पड़े कमजोर?​Image Credit : AP07 / 07

​​एयर डिफेंस सिस्टम क्यों पड़े कमजोर?​

ईरान के हमलों के बाद दावा किया गया कि कई देशों के एयर डिफेंस सिस्टम इन मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। खास तौर पर इजरायल का चर्चित एयर डिफेंस सिस्टम Iron Dome भी कई हमलों को इंटरसेप्ट नहीं कर सका। तेज रफ्तार और बदलते मार्ग वाली मिसाइलों ने पारंपरिक इंटरसेप्टर सिस्टम्स को बड़ी चुनौती दी। हालांकि आधिकारिक तौर पर नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन ईरान ने भारी क्षति का दावा किया है।

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