भारत की सबसे छोटी ट्रेन; कछुए से भी धीमी है रफ्तार! लेकिन शानदार सफर जिंदगी भर याद रहेगा
भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में लोगों के आने-जाने के लिए ट्रेन सबसे बड़ा और सस्ता साधन है। भारत में दुनिया का चौथा सबसे विशाल ट्रेन नेटवर्क है, जो 68584 किलोमीटर से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला है। यहां हर रोज 13000 से भी ज्यादा ट्रेनों से लाखों लोग सफर करते हैं। जहां भारत में शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस जैसी कई बड़ी और तेज रफ्तार ट्रेनें चलती हैं, वहीं एक ऐसी भी ट्रेन है जिसकी रफ्तार कछुए जैसी है, दूरी बेहद छोटी है, लेकिन अनुभव ऐसा कि लोग खास तौर पर इसे देखने और इसमें बैठने आते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे।
अनोखी है ये ट्रेन
भारत का रेल नेटवर्क इतना बड़ा है कि कई ट्रेनों को उत्तर से दक्षिण जाने के लिए कई-कई दिन का सफर करना पड़ता है। कुछ ट्रेनें लंबी दूरी का सफर तय करती हैं तो कई बेहद कम दूरी तक लोगों को लाने-ले जाने के लिए चलाई जा रही हैं। हम जिस ट्रेन के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, वो अपने कम डिब्बों के कारण ही दुनियाभर में मशहूर है, इस ट्रेन में सिर्फ तीन डिब्बे हैं और यह अपने खूबसूरत ट्रैक के लिए पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
देश की सबसे छोटी ट्रेन
ये बेहद खास ट्रेन केरल में चलती है जो मात्र नौ किलोमीटर का सफर तय करती है। इसे देश की सबसे छोटी ट्रेन कहा जाता है।
सफर है बेहद खुशनुमा
ये ट्रेन कोचीन हार्बर टर्मिनस से एर्नाकुलम जंक्शन तक यात्रियों को सफर कराती है। इसका सफर भले ही छोटा हो, लेकिन ये बेहद खूबसूरत है। हरियाली से ढके खेत, नारियल के पेड़, शांत वातावरण और केरल की प्राकृतिक सुंदरता इस यात्रा को खास बना देती है।
हरियाली का प्रतीक है इसका रंग
तीन डिब्बों वाली ये डीईएमयू ट्रेन हरे रंग की है, जो इसे अलग ही पहचान देती है। ये दिन में दो बार यात्रियों को खूबसूरत हरे भरे जंगलों और खेतों के नजारे दिखाते हुए मंजिल पर पहुंचाती है।
सफर सीधे मंजिल पर होता है खत्म
केरल की ये खास ट्रेन नौ किलोमीटर का अपना रास्ता चालीस मिनट में पूरा करती है, और कोचीन हार्बर टर्मिनस से एर्नाकुलम जंक्शन के बीच इसका कोई स्टॉप नहीं है।
इसका आकार ही इसकी खासियत
इस ट्रेन का छोटा होना और कम दूरी का सफर ही इसकी खासियत है, केरल आने वाले लगभग हर पर्यटक इसका सफर के लिए लालायित रहते हैं। इस ट्रेन में भले ही तीन डिब्बे हों, लेकिन इनमें 300 लोगों के बैठने के लिए सीटें हैं। हालांकि इसमें सफर करने वाले लोग ज्यादातर पर्यटक ही होते हैं, स्थानीय लोग इसमें कम ही सफर करते हैं। कई बार इसे बंद करने की भी बात की गई, लेकिन ये अभी भी चल रही है।
अभी मौका है कर ले इसका सफर, नही तो...
ऐसे में अगर हाल-फिलहाल केरल जाएं तो इस छोटी ट्रेन का सफर करना ना भूलें, क्या पता ये बाद में बंद हो जाए और ताउम्र आपको इसका मलाल रहे। ये नौ किलोमीटर का सफर आपको प्रकृति के करीब ले जाकर वो अनुभव देगा जो शायद ही आप कभी भूल पाएं।
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