चाणक्य के अनुसार रिश्ते की नींव विश्वास पर टिकी होती है। जहां झूठ और शक घर कर जाए, वहां प्रेम टिक नहीं सकता। जीवनसाथी ऐसा होना चाहिए जिस पर आंख बंद करके भरोसा किया जा सके।
जीवन हर दिन उत्सव नहीं होता। कठिन समय में जो साथी धैर्य रखे और भावनाओं पर नियंत्रण रखे, वही सच्चा सहचर है। क्रोधी स्वभाव रिश्तों को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है।
पति-पत्नी का रिश्ता बराबरी का होता है। चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने साथी के विचारों और भावनाओं का सम्मान करता है, वही रिश्ते को लंबे समय तक निभा सकता है।
एक अच्छा जीवनसाथी परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक कर्तव्यों को समझता है। वह केवल अधिकार नहीं चाहता, बल्कि कर्तव्यों को भी निभाता है।
लालच रिश्तों में तनाव लाता है। चाणक्य संतोष को सबसे बड़ा धन मानते हैं। जो व्यक्ति उपलब्ध संसाधनों में खुश रहना जानता है, वह घर में शांति बनाए रखता है।
समझदारी और संवादरिश्ते बातचीत से मजबूत होते हैं। समझदार साथी विवाद को लड़ाई बनने से पहले बातचीत से सुलझा लेता है।
चाणक्य ने चरित्र को व्यक्ति की असली पहचान कहा है। वफादारी और नैतिकता जीवनसाथी का सबसे बड़ा आभूषण है।