पाकिस्तान में 19 साल बाद बसंत उत्सव मनाया गया है। साल 2007 में पाकिस्तान की सरकार ने बसंत उत्सव पर रोक लगा दी थी।
बसंत उत्सव पर वहां पतंगबाजी के कारण कई तरह के हादसे हो चुके हैं। तेज मांझे से कटने और छतों से गिरकर मरने वालों की संख्या में इजाफे को देखते हुए साल 2007 में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।
पाकिस्तान में बसंत उत्सव का कल्चर बहुत पुराना है। 19 साल के ब्रेक के बाद एक फिर से बसंत उत्सव की धूम दिखी। वहां के लोग बसंत का त्योहार पतंग उड़ाकर करते हैं।
बसंत उत्सव के दौरान सुबह होते ही लोग अपने - अपने छतों पर इकट्ठा हो जाते हैं। सब पतंग उड़ाते हैं। हंसी मजाक करते हैं और लजीज पकवान भी खाए जाते हैं।
बसंत उत्सव पर पाकिस्तान में बच्चे रंगीन कपड़ों में नजर आते हैं तो वहीं बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं पीले कपड़े पहनकर सजे-धजे नजर आते हैं। घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। यहां पीले चावल की खीर खासतौर पर बनाई जाती है।
19 सालों तक बैन के कारण पाकिस्तान के जेन जी के लिए यह पहला बसंत उत्सव था। उनके चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती थी।
पाकिस्तान के बसंत उत्सव को अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा मिला हुआ है। पतंगबाजी देखने के लिए विदेशों से लोग आते हैं। होटल पूरी तरह टूरिस्टों से भर जाते हैं।