Mirza Ghalib Shayari: किसी जादू से कम नहीं हैं मिर्जा गालिब के ये मशहूर शेर, पढ़ें गालिब की शायरी हिंदी में

Mirza Ghalib Shayari: देश दुनिया का शायरों में सबसे मुकम्मल नाम रहे मिर्जा गालिब 15 फरवरी 1869 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। आज ग़ालिब की 157वीं पुण्यतिथि (Mirza Ghalib Death Anniversary) है। उन्हें उर्दू शायरी का सबसे बड़ा शायर कहा जाता है। आज मिर्जा गालिब की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनके कुछ मशहूर शेर:

Authored by: Suneet Singh Updated Feb 15 2026, 12:22 IST
मिर्जा गालिब की शायरीImage Credit : Facebook01 / 07

मिर्जा गालिब की शायरी

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल, जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

 'ग़ालिब' ये खयाल अच्छा है..Image Credit : Facebook02 / 07

'ग़ालिब' ये खयाल अच्छा है..

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है

इश्क़ ने गालिब..Image Credit : Facebook03 / 07

इश्क़ ने गालिब..

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के

उनके देखे से जो आ जाती है..Image Credit : Facebook04 / 07

उनके देखे से जो आ जाती है..

उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक़, वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

जिस काफिर पर दम निकले..Image Credit : Facebook05 / 07

जिस काफिर पर दम निकले..

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का, उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

हम बकलाएं क्याImage Credit : Facebook06 / 07

हम बकलाएं क्या

पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है, कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या

हाथ में तलवार भी नहीं..Image Credit : Facebook07 / 07

हाथ में तलवार भी नहीं..

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा, लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

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