सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपका विरोधी कौन है। उसकी ताकत, कमजोरियां, आदतें और स्वभाव क्या है। बिना समझ के कोई भी रणनीति सफल नहीं हो सकती। चाणक्य कहते हैं कि दुश्मन के मन और चाल को भांपना ही पहली चाल होती है।
जल्दबाज़ी शत्रु को मजबूत कर सकती है। चाणक्य यह सिखाते हैं कि सही समय आने तक प्रतीक्षा करना और स्थितियों को शांत मन से देखना शत्रु को मानसिक रूप से थका देता है। इससे वह खुद गलती कर बैठता है।
अहंकार एक व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी होती है। अगर शत्रु यह सोचने लगे कि वह जीत रहा है, तो उसकी सतर्कता घट जाती है। चाणक्य के अनुसार ऐसे समय में उसे भीतर से कमजोर बनाना आसान हो जाता है।
सटीक जानकारी के बिना कोई भी निर्णय प्रभावी नहीं हो सकता। चाणक्य जासूसी और सूचना-संग्रह को महत्वपूर्ण मानते थे। साथ ही, दुश्मन को गलत जानकारी देकर उसकी रणनीति को उलझाया जा सकता है।
कमजोर इंसान चाहे कितनी भी चालें चल ले, अंत में हारता है। चाणक्य नीति कहती है कि ज्ञान, अनुशासन, आत्मनियंत्रण और संसाधनों को सुदृढ़ करके ही विपक्षी को हराया जा सकता है। स्वयं की क्षमता को बढ़ाना ही एक बड़ा हथियार है।
हर विरोधी ही दुश्मन नहीं होता। चाणक्य स्पष्ट कहते हैं कि अनावश्यक शत्रुता से रिश्ते खराब होते हैं और आप स्वयं कमजोर पड़ते हैं। पहले समस्या की जड़ समझें, फिर रणनीति बनाएं।
चाणक्य मानते थे कि भावनाओं की जल्दबाी से निर्णय लेना गलत है। अपने मन को शांत रखकर, समझदारी से सोचें और स्थिति का विश्लेषण करें। तभी सबसे बेहतर रणनीति निकलती है। क्रोध और हड़बड़ी में प्रतिक्रिया अकसर हानि ही पहुंचाती है।