आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और तनाव के कारण एसिडिटी और गैस की समस्या बहुत आम हो गई है। ऐसे में कई लोग थोड़ी सी जलन या गैस होते ही तुरंत एंटासिड या एसिडिटी की दवा ले लेते हैं। ये दवाएं कुछ ही मिनटों में राहत जरूर देती हैं, लेकिन अगर इन्हें बार-बार और लंबे समय तक लिया जाए तो शरीर पर इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक खासकर PPI यानी प्रोटोन पंप इन्हिबिटर दवाओं का लगातार इस्तेमाल कई गंभीर हेल्थ रिस्क बढ़ा सकता है।
एसिडिटी होने पर लोग आमतौर पर एंटासिड या PPI दवाओं का सहारा लेते हैं। ये दवाएं पेट में बनने वाले एसिड को कम करती हैं, जिससे जलन, खट्टी डकार और गैस जैसी परेशानियों से जल्दी राहत मिल जाती है। इसी वजह से बहुत से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के भी इन दवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन यही आदत आगे चलकर परेशानी की वजह बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि PPI दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। कुछ रिसर्च में पाया गया है कि लगातार इन दवाओं का सेवन करने से क्रॉनिक किडनी डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है तो दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कुछ स्टडीज में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक PPI दवाओं का सेवन दिमागी सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। रिसर्च में यह आशंका जताई गई है कि इन दवाओं का लगातार उपयोग याददाश्त से जुड़ी समस्याओं और डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है। हालांकि इस पर अभी और रिसर्च चल रही है, लेकिन विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
एंटासिड और PPI दवाएं पेट के एसिड को कम करती हैं, लेकिन यही एसिड शरीर में कई जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। जब एसिड लंबे समय तक कम बना रहता है तो विटामिन B12, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इससे हड्डियों और शरीर की सेहत पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एसिडिटी की दवा लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अगर बार-बार गैस या एसिडिटी हो रही है तो खानपान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। मसालेदार खाना कम करना, समय पर भोजन करना, ज्यादा चाय-कॉफी से बचना और तनाव कम करना जैसी आदतें इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर सकती हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।