2025 में धर्मेंद्र ने कराया था मोतियाबिंद का ऑपरेशन, जानिए बुढ़ापे में क्यों बढ़ जाता है इसका रिस्क

बॉलीवुड के दिग्गज अभिने​ता धर्मेंद्र ने 2025 में मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) का ऑपरेशन कराया था। बता दें कि बुढ़ापे में मोतियाबिंद की समस्या का सामना ज्यादातर लोग करते हैंष, लेकिन आखिर क्यों बढ़ जाता है इसका खतरा, किन कारणों से होता है और समय रहते कौन-से सावधानियां अपनानी चाहिए, आज के लेख में जानेंगे।

धर्मेंद्र को बुढ़ापे में हो गया था मोतियाबिंद
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धर्मेंद्र को बुढ़ापे में हो गया था मोतियाबिंद

बॉलीवुड के लेजेंडरी अभिनेता धर्मेंद्र ने साल 2025 में मोतियाबिंद यानी कैटरैक्ट का सफल ऑपरेशन कराया था। यह खबर उनके फैन्स के लिए राहत की थी क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी पर असर पड़ना आम बात है। लेकिन सवाल यह है कि बुढ़ापे में मोतियाबिंद का रिस्क क्यों बढ़ जाता है? आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे इसके क्या कारण हैं जो उम्र-दराज लोगों में यह समस्या होती है और हम क्या कर सकते हैं कि इसे देर तक टाल सकें।

मोतियाबिंद क्या है
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मोतियाबिंद क्या है?

जब हमारी आंख की लेन्स (लेंस) समय के साथ धुंधली हो जाती है, तो उसे मोतियाबिंद कहते हैं। लेन्स में मौजूद प्रोटीन टूटकर बिखरने लगते हैं, जिससे रोशनी ठीक तरह से आँख के पिछले हिस्से तक नहीं पहुँच पाती। यदि समय रहते इलाज न हुआ हो तो दृष्टि कमजोर हो सकती है।

धर्मेंद्र ने कैसे कराया ऑपरेशन
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धर्मेंद्र ने कैसे कराया ऑपरेशन

89 वर्ष की उम्र में धर्मेंद्र ने 2025 में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। उनके इस कदम ने बतलाया कि उम्र सिर्फ संख्या नहीं है उपचार के लिए अभी भी सही समय है।

बुढ़ापे में रिस्क क्यों बढ़ जाता है
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बुढ़ापे में रिस्क क्यों बढ़ जाता है?

सबसे पहला कारण है उम्र-संबंधित बदलाव जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, लेंस के प्रोटीन टूटते-बिखरते हैं और लेन्स जमने लगती है। दूसरा कारण है शारीरिक रोग जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान आदि। ये मोतियाबिंद बनने के जोखिम को बढ़ाते हैं। तीसरा कारण है पर्यावरणीय कारक जैसे बहुत अधिक सूरज की UV किरणें, प्रदूषण आदि।

उम्र से पहले क्यों दिखने लगती है समस्या
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उम्र से पहले क्यों दिखने लगती है समस्या?

अगर आप उम्रदराज हैं तो सिर्फ यह नहीं कि उम्र बढ़ी है - बल्कि आपकी आँखें वर्षों से काम कर रही हैं, मोटे-मोटे बदलाव झेल रही हैं। लेन्स अंदर कठोर हो जाती है, लचीलेपन में कमी आती है। साथ ही बहुत समय तक सूरज कीकड़ी रोशनी में रहने से, धुएं-धूल में रहने से यह प्रक्रिया बढ़ सकती है।

समय रहते क्या कर सकते हैं बचाव
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समय रहते क्या कर सकते हैं बचाव

दोस्तों, इसे टालना पूरी तरह संभव है नहीं, लेकिन टालना जरूर संभव है। नियमित आंखों की जांच कराना, धूप में निकलते वक्त UV-प्रोटेक्टेड चश्मा लगाना, ब्लड शुगर-प्रेशर नियंत्रित रखना ये कुछ आसान कदम हैं। अगर बदलाव महसूस हो जाएं जैसे रोशनी कम लगना, रात में ड्राइविंग में परेशानी तो आंख के डॉक्टर से तुरंत मिलें।

क्या होता है इलाज
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क्या होता है इलाज

मोतियाबिंद का मतलब अंधेपन नहीं होतान आजकल ऑपरेशन बहुत सफल हैं और देखने की क्षमता फिर से बेहतर बनाने में मदद करते हैं। जैसे धर्मेंद्र ने अपनी उम्र में यह कदम लिया और बेहतर महसूस कर रहे हैं। यही उम्मीद हमें रखनी चाहिए।

डिस्क्लेमर
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​डिस्क्लेमर​

प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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