बरसात का मौसम आते ही अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग दही खाने से मना करते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब दही सेहत के लिए इतनी फायदेमंद है, तो बारिश में इसे खाने से क्यों रोका जाता है? आयुर्वेदिक स्त्री रोग विशेषज्ञ और आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि दही पौष्टिक जरूर है, लेकिन मानसून में इसे सही मात्रा और सही तरीके से खाना ही बेहतर माना जाता है।
दही में शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह पाचन को बेहतर रखने, शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती है। यही वजह है कि इसे रोजमर्रा की डाइट का अच्छा हिस्सा माना जाता है।
डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार बारिश के मौसम में हमारा पाचन पहले की तुलना में थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में दही देर से पच सकती है। इसकी वजह से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या अपच जैसी दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस मौसम में दही का जरूरत से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार रात में सादा दही खाने से बचना चाहिए। डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि इससे कुछ लोगों में कफ बढ़ सकता है और गले में खराश या बलगम की परेशानी हो सकती है। इसलिए अगर दही खानी भी हो, तो दिन के समय खाना बेहतर माना जाता है।
बरसात में दही पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सही तरीके से खाना जरूरी है। दही में थोड़ा भुना जीरा और काला नमक मिलाकर खा सकते हैं। इसे फ्रिज से निकालकर तुरंत न खाएं, बल्कि सामान्य तापमान पर आने दें। आयुर्वेद के अनुसार घी, चीनी या आंवला के साथ दही खाना भी बेहतर माना गया है।
अगर आपको पहले से गैस, अपच या खाना पचने में दिक्कत रहती है, तो मानसून में दही कम मात्रा में खाएं। इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर के लिए ज्यादा अच्छा माना जाता है। अगर दही खाने के बाद बार-बार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।