पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े नेता आए, लेकिन Jyoti Basu का नाम आज भी एक अलग पहचान रखता है। उन्होंने 21 जून 1977 से 5 नवंबर 2000 तक लगातार 23 साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद संभाला, जो भारत के इतिहास में सबसे लंबे कार्यकालों में से एक माना जाता है। वह Communist Party of India (Marxist) के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।
राजनीति में लंबे समय तक टिकना जहां आसान नहीं माना जाता है, वहीं ज्योति बसु ने यह कर दिखाया। 1977 में जब उन्होंने सत्ता संभाली, तब राज्य की राजनीति बदलाव के दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में वाम मोर्चा सरकार ने लगातार चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी और एक स्थिर शासन दिया।
ज्योति बसु के शासनकाल की सबसे बड़ी पहचान भूमि सुधार नीतियां रहीं। ‘ऑपरेशन बर्गा’ के जरिए किसानों को जमीन पर अधिकार मिला, जिससे ग्रामीण समाज में बड़ा बदलाव आया। साथ ही, उन्होंने पंचायत प्रणाली को मजबूत किया, जिससे लोकतंत्र गांव-गांव तक पहुंचा।
ज्योति बसु की छवि एक सादगीपूर्ण और जमीन से जुड़े नेता की रही। उन्होंने हमेशा दिखावे से दूर रहकर काम पर ध्यान दिया। यही वजह थी कि जनता का भरोसा उन पर लंबे समय तक बना रहा और उन्होंने बार-बार सत्ता में वापसी की।
1996 में उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन पार्टी के फैसले के चलते उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। बाद में उन्होंने खुद इसे “ऐतिहासिक भूल” बताया, जो उनके राजनीतिक जीवन की चर्चित घटनाओं में से एक है।
2000 में पद छोड़ने के बाद भी ज्योति बसु की नीतियों और विचारों का प्रभाव खत्म नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज भी उनकी छाप साफ दिखाई देती है। वर्तमान में यहां की सीएम Mamata Banerjee है, जो कि 2011 से राज्य की मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने वाम मोर्चा के लंबे शासन को समाप्त कर नया राजनीतिक दौर शुरू किया। हालांकि, ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए उन्हें अभी कई साल और सत्ता में बने रहना होगा।
1947 में पश्चिम बंगाल के गठन से लेकर अब तक कुल 8 लोग मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त हुए हैं। ये रही सभी की जानकारी 1. प्रफुल्ल चंद्र घोष (1947-1948, 1967-1968) 2. डॉ. बिधान चंद्र राय (1948-1962), 3. प्रफुल्ल चंद्र सेन (1962-1967), 4. अजय कुमार मुखर्जी (1967, 1969, 1971), 5. सिद्धार्थ शंकर रे (1972-1977). 6. ज्योति बसु (1977-2000), 7. बुद्धदेव भट्टाचार्य (2000-2011) और 8. ममता बनर्जी (2011-वर्तमान)