दक्षिण गोवा में स्थित बटरफ्लाई बीच और उसके आसपास के इलाके को 'तितलियों की घाटी' के तौर पर जाना जाता है। यह एक खूबसूरत, एकांत और छिपा हुआ तट है।
बता दें कि यह जंगल और तटीय वनस्पतियों से घिरा हुआ एक स्थान है, जो तितलियों को एक उपयुक्त आवास प्रदान करता है। मौसमी जलवायु और कई साले फूल पौधों के कारण यहां बड़ी संख्या में तितलियां आती हैं।
बटरफ्लाई बीच पर मानसून के बाद तितलियों की कई रंग-बिरंगी प्रजातियां नजर आई है। उसमें ब्लू मॉर्मन, पेरिस पीकॉक, कोमन जे, कोमन फाइव रिंग, ऑरेंज लेमन एमिग्रेंट, ओरिएंटल डार्क पामडार्ट, कोमन पामफ्लाई आदि शामिल है। इसके अलावा भी यहां कई तितलियों की प्रजातियां पाई जाती है।
तितलियों की यह घाटी हर साल लाखों की संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसके साथ ही फोटोग्राफी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है। और यह पर्यटन है तो यहां की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
केवल पर्यटन के लिए ही नहीं बल्कि तितलियां इस स्थान के इकोसिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण है। तितलियां एक परागणकर्ता होती हैं, जो पौधों के प्रजनन में सहायता करती हैं। साथ ही यह पर्यावरण के स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में भी काम करती है।
बटरफ्लाई बीच के अलावा छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को तितलियों की विविधता के कारण तितलियों की घाटी यानी उनका घर कहा जाता है।
बटरफ्लाई बीच को 'तितलियों की वैली' के नाम से इसलिए जाना जाता है, क्योंकि यहां तितलियों की कई प्रजातियां पाई जाती है।