प्रशासनिक पदों को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि कमिश्नर और कलेक्टर में क्या अंतर होता है। दोनों में कौन ज्यादा पावरफुल होता है।
बता दें कलेक्टर को जिलाधिकारी यानी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) कहा जाता है। वहीं कमिश्वर को संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) कहा जाता है।
कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होता है। वह आमतौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होता है। इनका मुख्य कार्य कानून व्यवस्था बनाए रखना, भूमि संबंधी मामलों का निपटारा, राजस्व प्रशासन, चुनाव कार्य, आपदा प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होता है।
जिले के सभी सरकारी विभाग पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि कलेक्टर के अंतर्गत काम करते हैं। साथ ही किसी आपात स्थिति जैसे बाढ़, सूखा या कोई दंगा होने पर कलेक्टर अहम भूमिका निभाते हैं।
वहीं कमिश्नर का कार्यक्षेत्र कलेक्टर से बड़ा होता है। इसके अंतर्गत कई जिले आते हैं। यह भी आमतौर पर एक आईएएस अधिकारी होते हैं।
कमिश्नर का मुख्य कार्य अपने डिवीजन ) के सभी जिलों के प्रशासन की निगरानी और मार्गदर्शन करना होता है। कहा जाता है कि एक डिविजनल कमिश्नर संबंधित डिवीजन में भूमि राजस्व संग्रह, नहर राजस्व संग्रह और कानून व्यवस्था के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होता है।
वहीं सैलरी की बात करें तो डीएम और कमिश्नर उच्च स्तर के प्रशासनिक पद होते हैं। ऐसे में इन्हें मिलने वाली सैलरी और सुविधाएं भी शानदार होती हैं। सुविधाओं की बात करें तो अधिकारियों को बंगला, गाड़ी व गार्ड समेत सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं।