एयरपोर्ट को आमतौर पर आधुनिक शहरों की कनेक्टिविटी की पहचान माना जाता है। यहां बड़े टर्मिनल, लंबे रनवे और हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है। ज्यादातर लोगों के लिए एयरपोर्ट किसी नए शहर या देश में प्रवेश का पहला स्थान होता है। लेकिन आपने शायद ध्यान दिया होगा कि अधिकतर एयरपोर्ट शहर के बीच में नहीं, बल्कि उससे काफी दूर बनाए जाते हैं। इसके पीछे का कारण क्य है? आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि एयरपोर्ट शहरों से दूर क्यों बनाए जाते हैं।
एयरपोर्ट बनाने के लिए लंबे रनवे, टैक्सीवे, टर्मिनल बिल्डिंग, विमानों की पार्किंग और मेंटेनेंस हैंगर जैसी कई सुविधाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीन चाहिए होती है। शहर के बीच इतनी बड़ी खाली जगह मिलना मुश्किल है। इसलिए एयरपोर्ट आमतौर पर शहर के बाहर बनाए जाते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर भविष्य में विस्तार किया जा सके।
जब विमान उड़ान भरते हैं या लैंडिंग करते हैं, तो बहुत तेज आवाज होती है। अगर एयरपोर्ट शहर के बीच में होगा, तो आसपास रहने वाले लोगों को लगातार शोर झेलना होगा। इसलिए एयरपोर्ट को रिहायशी इलाकों से दूर बनाया जाता है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
शहर के बीच का एरिया सबसे ज्यादा प्रीमियम होता है। जितना शहर के केंद्र में जमीन लेने की सोचेंगे, उतनी ही कीमत आसमान छूती चली जाएगी। ऐसे में वहां एयरपोर्ट बनाना काफी महंगा पड़ सकता है। इसके मुकाबले शहर के बाहर जमीन सस्ती मिल जाती है, जिससे एयरपोर्ट बनाना और उसका संचालन करना आसान हो जाता है।
हवाई यात्रा लगातार बढ़ रही है, विमानों की संख्या भी बढ़ रही है, ऐसे में रनवे भी बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए एयरपोर्ट को समय-समय पर विस्तार करना पड़ता है। अगर एयरपोर्ट शहर के बीच में होगा तो उसे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा। शहर से दूर एयरपोर्ट होने पर नए रनवे, टर्मिनल और अन्य सुविधाएं जोड़ना आसान होता है।
एयरपोर्ट बनाते समय इलाके की जमीन, मौसम और आसपास की बाधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। शहर से दूर समतल और खुली जगहों पर एयरपोर्ट बनाना ज्यादा सुरक्षित होता है। एक तो प्रदूषण भी नहीं होता, दूसरा शहरी आबादी को शोर भी नहीं झेलना पड़ता है।