भारत की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झील गोविंद वल्लभ पंत सागर है, जिसे रिहंद जलाशय भी कहा जाता है। यह सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) के पिपरी क्षेत्र में स्थित है, जबकि इसका कुछ हिस्सा सिंगरौली (मध्य प्रदेश) तक फैला हुआ है।
इस विशाल झील का निर्माण रिहंद बांध के बनने से हुआ। यह बांध लगभग 300 फीट ऊंचा और 934 मीटर लंबा है। इसे रिहंद नदी पर बनाया गया है, जो सोन नदी की प्रमुख सहायक नदी है।
कुल क्षेत्रफल: लगभग 450 वर्ग किलोमीटरगहराई: करीब 90 मीटरजल भंडारण क्षमता: 10.6 बिलियन क्यूबिक मीटरयह आंकड़े इसे देश की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झील बनाते हैं।
इस झील का नाम उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के सम्मान में रखा गया है। इसकी आधारशिला जवाहरलाल नेहरू ने वर्ष 1954 में रखी थी। बांध का निर्माण 1962 में पूरा हुआ और 6 जनवरी 1963 को इसका उद्घाटन किया गया।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा:सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति (उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रों में)ताप विद्युत केंद्रों में कूलिंग के लिए उपयोगऔद्योगिक कार्यों में पानी की आपूर्तिपर्यावरण और प्रभाव
इस झील के बनने से एक बड़ी आर्द्रभूमि (Wetland) का निर्माण हुआ, जो पर्यावरण के लिए लाभकारी है। हालांकि, बांध निर्माण के दौरान कई लोगों को विस्थापन का सामना भी करना पड़ा, जो इस तरह की परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू है।
गोविंद वल्लभ पंत सागर न केवल भारत की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झील है, बल्कि यह ऊर्जा, सिंचाई और पर्यावरण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।