सुबह मजदूरी, रात में पढ़ाई, 720 में 677 नंबर लाकर नीट एग्जाम किया क्रैक, डॉक्टर बनने की तैयारी शुरू

NEET Sheikh Sarfraz Success Story: आपने अक्सर अपने माता-पिता से सुना होगा कि हमने तो मोमबत्ती जलाकर पढ़ाई की है। जिसे पढ़ना होता है वह किसी भी स्थिति में पढ़ लेता है, जिसे नहीं पढ़ना होता है, दुनिया कि तमाम सुविधाओं के बीच भी वह नहीं पढ़ पाता है। इसकी पहली लाइन यानी किसी भी स्थिति में पढ़ने वाली बात सच साबित कर दिखाई है एक दिहाड़ी मजदूर शेख सरफराज ने। आज हम आपको उन्हीं की मोटिवेशनल स्टोरी सुनना जा रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे की दिहाड़ी मजदूर की कहानी किसी को क्यों जाननी है। लेकिन तपती धूप, बरसते बादल, कड़ाके की ठंड के बीच सिर पर ईंटें ढोने वाले दिहाड़ी मजदूर शेख सरफराज ने डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा करने के लिए मेडिकल की सबसे कठिन परीक्षा NEET UG पास एक मिसाल कायम की है। इनकी कहानी आज के हजारों युवाओं को उनका सपना पूरा करने के लिए प्रेरणा देती है।

Authored by: वर्षा कुशवाहाUpdated Mar 9 2026, 13:57 IST
कौन है शेख सरफराज?Image Credit : Canva01 / 08

कौन है शेख सरफराज?

​शेख सरफराज पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के रहने वाले हैं। उनका पूरा परिवार मजदूरी करके गुजर-बसर करता है। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सरफराज ने भी अपने परिवार का साथ देने के लिए मजदूरी शुरू कर दी, लेकिन उन्होंने शिक्षा से नाता नहीं तोड़ा। क्योंकि उनके सपने बड़े थे और हौसले बुलंद थे।​

ईंटें ढोकर दिया परिवार का सहाराImage Credit : Canva02 / 08

ईंटें ढोकर दिया परिवार का सहारा

​परिवार की मदद करने के लिए सरफराज हर दिन सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक सिर पर ईंटें ढोने का काम करते थे। इसके लिए उन्हें प्रतिदिन 200 से 400 रुपये मिलते थे।​

एनडीए में जाने का था सपनाImage Credit : Canva03 / 08

एनडीए में जाने का था सपना

सरफराज का शुरुआत में एनडीए में जाने का सपना था। क्योंकि वह शुरू से ही पढ़ाई में होनहार थे, उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास भी कर ली थी। लेकिन कहते हैं न नियती में कुछ और ही लिखा था। एनडीए के इंटरव्यू से करीब एक महीने पहले उनका एक्सीडेंट हो गया, जिसके कारण वह इंटरव्यू पास नहीं कर पाए और मेडिकल टेस्ट में सफल नहीं हो पाए।

डॉक्टर बनने की चुनी राहImage Credit : Canva04 / 08

डॉक्टर बनने की चुनी राह

​एनडीए में सिलेक्शन न होने के बाद वह हार मानकर नहीं बैठे। उन्होंने रास्ता बदला और डॉक्टर बनने का फैसला लिया। फैसला लेना तो आसान होता है, लेकिन उसके लिए मेहनत कर पाना सबके बस की बात नहीं होती है। लेकिन सरफराज ने कड़ी मेहनत शुरू की।

मजदूरी और टूटे फोन के साथ नीट की तैयारीImage Credit : Canva05 / 08

मजदूरी और टूटे फोन के साथ नीट की तैयारी

​एनडीए में असफल होने के बाद सरफराज ने घुटने नहीं टेके और तुरंत NEET UG की तैयारी शुरू कर दी। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सरफराज वे अपने शिक्षक से उनका टूटा हुआ फोन लिया और उससे तैयारी।​

8 घंटे की मजदूरी के बाद की जमकर पढ़ाईImage Credit : Canva06 / 08

8 घंटे की मजदूरी के बाद की जमकर पढ़ाई

​परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सरफराज सुबह 8 घंटे की मजदूरी करते थे। फिर घर आकर एक घंटे के आराम करते थे और उसके बाद वह NEET UG की तैयारी में जुट जाते थे। बीते वर्षों के पेपर हल करते थे।​

2024 में नीट परीक्षा में पाए 677 अंकImage Credit : Canva07 / 08

2024 में नीट परीक्षा में पाए 677 अंक

​सरफराज ने 2024 में हुई नीट की परीक्षा में हिस्सा लिया और सबको चौंका दिया। सुबह दिहाड़ी मजदूरी करने वाले एक युवक ने टूटे हुए फोन से तैयारी कर NEET UG की परीक्षा क्रैक जो कर ली थी। न केवल सरफराज ने परीक्षा पास की, बल्कि 720 अंकों में 677 अंक प्राप्त किए।

कोचिंग टीचर ने की एडमिशन में आर्थिक मददImage Credit : Canva08 / 08

कोचिंग टीचर ने की एडमिशन में आर्थिक मदद

​उनकी इस सफलता को देखते हुए कोचिंग संस्थापक अखल पांडे ने उनकी आर्थिक तौर पर मदद की और उन्होंने नील रतन मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया। सरफराज से जब उनके आगे के प्लान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह डॉक्टर बनने के बाद गरीब तबके के लोगों का मुफ्त में इलाज करना चाहते हैं।​ ​

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!