हरीश वशिष्ठ हरिया के भिवानी जिले के रहने वाले हैं। वह एक सामान्य किसान परिवार से हैं। वह बचपन से ही आर्मी में जाना जाते थे और एक अधिकारी बन अपने परिवार का नाम रोशन करना और देश के लिए कुछ करना चाहते थे। ठीक ऐसा ही हरीश के माता-पिता भी चाहते थे। वह अपने बेटे को सेना में अधिकारी बने हुए देखना का सपना देख रहे थे।
हरीश ने खुब लगन से यूपीएससी एनडीए की परीक्षा की तैयारी की लेकिन उन्हें न पहले अटेम्प्ट में सफलता मिली न ही दूसरे और तीसरे अटेम्प्ट में वह सफल हुए। ऐसा नहीं है कि हरीश परीक्षा क्वालीफाई नहीं कर पा रहे थे। वह परीक्षा तो पास कर रहे थे लेकिन परीक्षा के बाद होने वाले एसएसबी इंटरव्यू में सफल न होने के कारण उन्हें पुनः प्रयास करना पड़ रहा था।
तीन प्रयासों में असफल होने के बाद हरीश ने चौथी बार परीक्षा दी। इस बार उन्होंने न केवल परीक्षा पास की बल्कि इंटरव्यू भी पास कर लिया और सेना में जाने के उनके सफर की शुरुआत हुई।
हरीश ने बताया कि वह जितनी बार परीक्षा में असफल होते थे, उसके बाद वह डबल मेहनत करते थे। इतना ही नहीं किस वजह से वह असफल रहे उन्होंने क्या गलतियां की है उन सब पर भी खास ध्यान दिया है। इस दौरान हरीश ने अपनी गलतियों से सीखा और मंजिल तक पहुंचे।
तमाम परेशानियों के बाद भी हरीश ने हार नहीं मानी और परीक्षा की तैयारी करते रहे। इसमें उनके परिवार ने उनका पूरा सपोर्ट किया।
किसान परिवार से होते हुए और कई कठिनाइयों को पार करते हुए हरीश ने अपने सपने को पूरा किया। आज उनकी यह कहानी हजारों युवाओं की प्रेरणा बन गई है।