विदेशी बैंक की नौकरी छोड़ चुनी UPSC की राह, 216 रैंक के साथ IPS बन रचा इतिहास

राजस्थान पुलिस के तेज-तर्रार अधिकारियों में गिने जाने वाले IPS Mridul Kachhawa आज ऐसे अधिकारी बन चुके हैं जिनका नाम सुनकर अपराधियों में खौफ पैदा हो जाता है। वर्ष 2015 बैच के राजस्थान कैडर के इस अधिकारी ने न केवल कठिन मेहनत से सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की, बल्कि अपनी तैनाती के दौरान अपराध और नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर एक अलग पहचान बनाई है।

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Mar 14 2026, 17:05 IST
विदेशी बैंक की नौकरी छोड़ चुनी UPSC की राह, 216 रैंक के साथ IPS बन रचा इतिहासImage Credit : TNN01 / 07

विदेशी बैंक की नौकरी छोड़ चुनी UPSC की राह, 216 रैंक के साथ IPS बन रचा इतिहास

राजस्थान सरकार ने 13 मार्च को 64 IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया, जिसके तहत जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और कई जिलों की पोस्टिंग में अहम बदलाव किए गए। इस फेरबदल के तहत, मृदुल कछावा को एसपी बीकानेर लगाया गया है। IPS Mridul Kachhawa का नाम सुनकर अपराधियों में खौफ पैदा हो जाता है। वर्ष 2015 बैच के राजस्थान कैडर के इस अधिकारी ने न केवल कठिन मेहनत से सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की, बल्कि अपनी तैनाती के दौरान अपराध और नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर एक अलग पहचान बनाई है। चंबल के बीहड़ों में डकैतों को आत्मसमर्पण करवाने से लेकर नागौर में नशे के खिलाफ बड़े अभियान चलाने तक उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा से भरा है।

साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तकImage Credit : TNN02 / 07

साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक

मृदुल कच्छावा का जन्म 30 अगस्त 1989 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था। (IPS Mridul Kachawa Education) इनकी शुरुआती पढ़ाई यहीं हुई। बाद में परिवार के Jaipur आने के बाद उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर बी.कॉम किया। इसके बाद उन्होंने University of Rajasthan से इंटरनेशनल बिजनेस में मास्टर्स किया। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और कंपनी सेक्रेटरी (CS) जैसी कठिन परीक्षाएं भी पास कीं, जिससे उनके करियर के कई रास्ते खुल गए।

आरामदायक नौकरी छोड़कर चुना सेवा का रास्ताImage Credit : TNN03 / 07

आरामदायक नौकरी छोड़कर चुना सेवा का रास्ता

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें Deutsche Bank में अच्छी नौकरी मिल गई। लेकिन उनके दिल में हमेशा देश सेवा और वर्दी पहनने का सपना था। उन्होंने National Defence Academy में जाने की कोशिश की, लेकिन दो बार असफल रहे।

हार न मानने की कहानीImage Credit : TNN04 / 07

हार न मानने की कहानी

निराश होने के बजाय उन्होंने नया लक्ष्य तय किया—आईपीएस बनना। इसके लिए वे दिल्ली गए और कड़ी मेहनत के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में उन्हें India Post की सेवा मिली, लेकिन वे रुके नहीं, उन्होंने कोशिश जारी रखी। आखिरकार 2015 में उन्होंने (Mridul Kachawa IPS Rank) ऑल इंडिया रैंक 216 हासिल कर आईपीएस बनकर अपना सपना पूरा कर लिया।

चंबल के बीहड़ों में अपराध के खिलाफ जंगImage Credit : TNN05 / 07

चंबल के बीहड़ों में अपराध के खिलाफ जंग

आईपीएस बनने के बाद जब उनकी तैनाती राजस्थान के Dholpur जिले में एसपी के रूप में हुई, तब यह क्षेत्र चंबल के बीहड़ों के कारण डकैतों के लिए कुख्यात माना जाता था। 2019 से 2020 के बीच उन्होंने अपनी टीम के साथ कई साहसी अभियान चलाए। कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी वे खुद AK-47 लेकर टीम के साथ बीहड़ों में उतरे। इस दौरान उनकी रणनीति और सख्त कार्रवाई के कारण करीब 57 डकैत और हार्डकोर अपराधी गिरफ्तार किए गए, जबकि कई कुख्यात डकैतों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

नागौर में ‘ऑपरेशन नीलकंठ’Image Credit : TNN06 / 07

नागौर में ‘ऑपरेशन नीलकंठ’

उन्होंने नशा तस्करी के खिलाफ “ऑपरेशन नीलकंठ” शुरू किया था। इस अभियान के तहत गुप्त सूचनाओं के आधार पर लगातार छापेमारी की। पिछले कुछ महीनों में करोड़ों रुपये की ड्रग्स बरामद की है। एक बड़ी कार्रवाई में बाथरूम के तहखाने से करीब 1.35 करोड़ रुपये कीमत का मेफेड्रोन (MD) बरामद हुआ। इसके अलावा अफीम, डोडा पोस्त, नकदी और हवाला से जुड़े दस्तावेज भी पकड़े गए। सिर्फ पांच महीनों में 55 केस दर्ज हुए और 81 तस्कर गिरफ्तार किए गए, जिससे नशा तस्करों का नेटवर्क कमजोर पड़ गया।

एक अधिकारी, कई प्रेरणाएंImage Credit : TNN07 / 07

एक अधिकारी, कई प्रेरणाएं

सख्त पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ मृदुल कच्छावा का व्यक्तित्व बहुआयामी है। उन्हें घुड़सवारी, बास्केटबॉल, कुत्ते पालना और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी का शौक है। उनका मानना है कि घुड़सवारी अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व क्षमता सिखाती है। (IPS Mridul Kachawa Family) साल 2018 में उनकी शादी कनिका सिंह से हुई, जो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की बेटी हैं। आईपीएस मृदुल कच्छावा की कहानी यह बताती है कि असफलताएं रास्ता रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। आरामदायक नौकरी छोड़कर देश सेवा का सपना पूरा करना, कठिन परिस्थितियों में भी अपराध के खिलाफ डटकर खड़े रहना—यही उन्हें एक प्रेरणादायक अधिकारी बनाता है।

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