Earth से कितना मिलता जुलता है Super Earth, हमारी पृथ्वी से कितनी है दूर

जरा सोचिए, आप रात में आसमान की तरफ देख रहे हैं और आपको पता है कि उन दूर की रोशनी की छोटे-छोटे तारों के बीच कहीं और एक ऐसी दुनिया हो सकती है जहां जिंदगी के लिए जरूरी हालात हों, जहां पृथ्वी जैसा माहौल हो, या मौसम हो, तो क्या आप वहां जाना चाहेंगे।

Earth से कितना मिलता जुलता है Super Earth
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Earth से कितना मिलता जुलता है Super Earth

एस्ट्रोनॉमर्स लंबे समय से हमारी पुथ्वी जैसी दुनिया वाले ग्रहों की तलाश कर रहे हैं। और अब, एक नई खोज इस सपने को हकीकत के थोड़ा और करीब ले आई है। रिसर्चर्स की एक टीम ने GJ 251 c नाम के एक ग्रह “सुपर-अर्थ” की पहचान की है।

Earth से कितना दूर है Super Earth
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Earth से कितना दूर है Super Earth

ये Super Earth हमारी पृथ्वी से 18 लाइट-ईयर दूर है। (प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है)

खोज की खास बात
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खोज की खास बात

इस खोज को इतना खास यह बात बनाती है कि यह ग्रह अपने तारे के हैबिटेबल जोन में ठीक उसी जगह पर है, जहां का तापमान लिक्विड को लिक्विड बने रहने में मदद करता है, यही कारण है कि माना जा रहा है कि यहां जिंदगी की तलाश की जा सकती है।

कैसे ढूंढा सुपर अर्थ
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कैसे ढूंढा सुपर अर्थ

GJ 251 c (Super Earth) की खोज, पृथ्वी जैसे ग्रहों की चल रही खोज में हाल की सबसे प्रॉमिसिंग खोजों में से एक है। द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में पब्लिश हुई रिसर्च में बताया गया है कि कैसे एस्ट्रोनॉमर्स ने कई टेलीस्कोप से मिले डेटा का इस्तेमाल करके कैनिस माइनर 'Canis Minor' तारामंडल में मौजूद GJ 251 c नाम के एक तारे के चारों ओर इस ग्रह के होने की पुष्टि की।

क्यों है सुपर अर्थ
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क्यों है सुपर अर्थ

GJ 251 c को एक सुपर-अर्थ बताया गया है, यह उन ग्रहों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है जो पृथ्वी से ज्यादा भारी होते हैं लेकिन नेपच्यून 'Neptune' जैसे आइस जायंट से छोटे होते हैं।बता दें, यह पृथ्वी से परे जीवन की खोज में सबसे जरूरी सुराग है।

कितने समय में पहुंचा जा सकता है सुपरअर्थ
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कितने समय में पहुंचा जा सकता है सुपरअर्थ

GJ 251 c को जो चीज खास बनाती है, वह है इसकी नजदीकी। 18 लाइट-ईयर दूर होने के कारण, यह अब तक खोजे गए सबसे नजदीकी संभावित रहने लायक ग्रहों में से एक है। इसे समझने के लिए, अगर हम लाइट की स्पीड से यात्रा कर पाते, तो हम 20 साल से भी कम समय में वहां पहुंच सकते हैं। हालांकि इतनी स्पीड से इंसानों का सफर अभी साइंस फिक्शन ही है यानी कल्पना मात्र। लेकिन इस ग्रह की दूरी कम का मतलब है कि एस्ट्रोनॉमर अन्य ग्रहों के मुकाबले कहीं ज्यादा डिटेल में स्टडी कर सकते हैं।

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