देश में अकसर आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा की बात आती है तो एनडीआरएफ का नाम सबसे पहले आता है। इसी तरह आपने CISF, CRPF के बारे में भी सुना होगा। ऐसे में चलिये आपको बताते हैं कि एनडीआरएफ, सीआईएसएफ और सीआरपीएफ से कैसे अलग है।
NDRF का मतलब होता है- नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF). साल 2006 में इसका गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत किया गया था। ये भूकंप, बाढ़, भूस्खलन और प्राकृतिक या फिर मानव निर्मित आपदाओं में राहत और बचाव कार्यों के लिए बनाया गया है।ये केंद्र सरकार के अधीन काम करता है।
एनडीआरएफ की बात करें तो इसका सबसे मुख्य काम सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन करना, बाढ़ व चक्रवात में रेस्क्यू, आपदा से पहले की तैयारियां और मॉक ड्रिल, राज्य सरकारों और एसडीआरएफ के साथ मिलकर काम करना होता है।
कई लोग सोचते हैं कि एनडीआरएफ में सीधे भर्ती होती है। मगर ऐसा नहीं है। एनडीआरएफ में जवानों की सीधी भर्ती नहीं होती, बल्कि सबसे पहले उम्मीदवार को किसी पैरामिलिट्री फोर्स ( BSF, CRPF या फिर ITBP ) में भर्ती होना होता है ।
CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसे बलों में काम कर रहे जवानों को उनकी फिटनेस, एक्सपीरियंस और प्रदर्शन के आधार पर NDRF में भेजा जाता है।
NDRF में ऐसे जवान चुने जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हों। चयन के दौरान फिटनेस, डिसीप्लेन और मुश्किल स्थिति में भी काम करने की क्षमता देखी जाती है। इसके बाद जवानों को विशेष ट्रेनिंग मिलती है।
NDRF में सीधी भर्ती नहीं होती इसलिये अलग से तय सैलरी नहीं होती है। हालांकि इसमें शामिल जवानों को पैरामिलिट्री से भेजा जाता है। इसलिये उन्हें मूल फोर्स के अनुसार वेतन मिलता है। कांस्टेबल की शुरुआती सैलरी आमतौर पर 25,000 से 40,000 प्रतिमाह होती है। एक्सपीरियंस और रैंक के हिसाब से ये 50-80 हजार से भी ज्यादा पहुंच सकती है।
BSF, CRPF और NDRF तीनों के काम अलग हैं। BSF (सीमा सुरक्षा बल) का काम देश की सीमाओं की रक्षा करना, सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के काम देश के अंदर कानून व्यवस्था को बनाए रखना और एनडीआरएफ का काम आपदा राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन करना होता है।