क्या आसमान में भी लगता है ट्रैफिक, जानें क्या होता है एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम

अकसर हम जब भी आसमान में उड़ते जहाजों को देखते हैं तो दिमाग में यही ख्याल आता है कि प्लेन की तो मौज है क्योंकि आसमान में ट्रैफिक नहीं लगता होगा। आसमान में तो रास्ता साफ रहता है तो ऐसे में प्लेन को आने-जाने में दिक्कत नहीं होती होगी। मगर क्या आपको पता है कि प्लेन्स का भी एक अलग रूल होता है। आसमान में प्लेन्स की आवाजाही के लिए क्या रूट प्लान है और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम क्या है, चलिये आपको बताते हैं...

प्लेन के लिए फिक्स होते हैं रास्ते
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प्लेन के लिए फिक्स होते हैं रास्ते

प्लेन के रास्ते एकदम जमीनी रास्तों से अलग होते हैं। हवाई जहाजों का अपना एक फिक्स रास्ता होता है, जिसके जरिये ये उड़ान भरते हैं। तो सवाल ये कि पायलट को इन रास्तों के बारे में जानकारी कैसे मिलती है। उसे डायरेक्शन का पता कैसे रहता है?

एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ली जाती है मदद
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एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ली जाती है मदद

हवाई जहाज का अपना एक रास्ता होता है। जो हमेशा ही एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की रेंज में ही रहता है। इनकी सभी बातों को पायलट्स को फॉलो करना जरूरी होता है। मगर पुराने समय में ऐसा बिल्कुल नहीं होता था।

पुराने समय में कैसे उड़ते थे प्लेन
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पुराने समय में कैसे उड़ते थे प्लेन ?

पुराने समय में प्लेन्स सड़क, जमीन मकान और इमारतों का सहारा लिया करते थे और उनकी मदद से रास्ता देखते थे। मगर बाद में जब इस कॉन्सेप्ट ने अच्छे रिजल्ट नहीं दिये तो अमेरिका एक क्रांति लेकर आया।

अमेरिका लाया एरो सिस्टम
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अमेरिका लाया एरो सिस्टम

अमेरिका ने जमीन पर बड़े-बड़े तीर बनाना शुरू किया। ये तीर इतने बड़े होते थे कि आसमान से बड़ी आसानी से दिख जाते थे। मगर इन तीरों के साथ ये समस्या थी कि ये रात में नजर नहीं आते थे। तो फिर इस समस्या से निपटने के लिए इन तीरों के पास लाइट लगाई गई।

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर
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एयर ट्रैफिक कंट्रोलर

इस तरह से काम चलता रहा। वक्त के साथ सिस्टम को अपग्रेड किया गया और फिर रेडियो और रडार का इस्तेमाल किया गया। साथ ही प्लेन के रास्ते की पूरी जिम्मेदारी पायलट्स की ही नहीं रह गई। अब इस काम के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को बना दिया गया।

कैसे काम करता है रडार
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कैसे काम करता है रडार ?

इस कंट्रोल रूम के जरिये पायलट्स को ये जानकारी दी जाती है कि प्लेन को कितनी ऊंचाई पर उड़ाना है। साथ ही किस रास्ते पर लेकर जाना है। ऐसे में जब रास्ता दिखाने के लिए सिर्फ रडार का इस्तेमाल होता है तो समझते हैं कि ये काम कैसे करता है।

कैसे काम करता है रडार
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कैसे काम करता है रडार ?

रडार से रेडियो वेव्स भेजी जाती हैं, जो प्लेन से टकराकर वापस आती हैं। वेव्स के जाने और टकराकर आने में जितना समय लगता है, उससे प्लेन के बारे में पता लगाया जाता है।

तगड़ी होती है रडार की रेंज
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तगड़ी होती है रडार की रेंज

इस सिस्टम से ये पता चलता है कि कौन सा विमान किस गति से चल रहा है और धरती पर कितने समय में पहुंच जाएगा। रडार की रेंज काफी ज्यादा होती है। इसकी मदद से विमान के रास्ते, ऊंचाई और समय को कंट्रोल किया जाता है और इसी वजह से आसमान में बादलों के ऊपर प्लेनों की भीड़ नहीं लगती है।

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