Delhi: प्रदूषण से लड़ाई में AI का सहारा, IIT कानपुर के साथ नई व्यवस्था तैयार करेगी दिल्ली सरकार

Delhi Pollution: दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब सरकार तकनीक आधारित और डाटा-ड्रिवन रणनीति की ओर कदम बढ़ा रही है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साथ मिलकर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इस सिस्टम के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, रियल-टाइम निगरानी और हॉटस्पॉट आधारित कार्रवाई को और सटीक बनाया जाएगा।

Authored by: निशांत तिवारीUpdated Dec 29 2025, 14:11 IST
प्रदूषण के खिलाफ वैज्ञानिक रणनीति पर जोरImage Credit : AI Image01 / 07

प्रदूषण के खिलाफ वैज्ञानिक रणनीति पर जोर

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रदूषण से लड़ाई को वैज्ञानिक, दीर्घकालिक और रणनीतिक बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रतिक्रियात्मक फैसलों के बजाय रियल-टाइम डेटा और ठोस प्रमाणों के आधार पर कदम उठाना है। (सांकेतिक तस्वीर)

AI आधारित सिस्टम से बदलेगा फैसला लेने का तरीकाImage Credit : AI Image02 / 07

AI आधारित सिस्टम से बदलेगा फैसला लेने का तरीका

प्रस्तावित AI-सक्षम DSS यानी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के तहत हाइपरलोकल सोर्स से डाटा कलेक्शन, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस को शामिल किया जाएगा। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण के सटीक कारणों की पहचान आसान होगी। (सांकेतिक तस्वीर)

‘ब्लैंकेट बैन’ की जगह हॉटस्पॉट पर एक्शनImage Credit : AI Image03 / 07

‘ब्लैंकेट बैन’ की जगह हॉटस्पॉट पर एक्शन

सरकार का फोकस पूरे शहर पर एक जैसे प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित कार्रवाई करने का है। डायनेमिक सोर्स अपॉर्शनमेंट के जरिए धूल, वाहन, उद्योग, बायोमास जलाने और क्षेत्रीय कारणों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। (सांकेतिक तस्वीर)

365 दिन का एक्शन फ्रेमवर्कImage Credit : AI Image04 / 07

365 दिन का एक्शन फ्रेमवर्क

पर्यावरण मंत्री ने साफ किया कि प्रदूषण नियंत्रण मौसमी नहीं हो सकता। दिल्ली को सालभर लागू रहने वाली ऐसी नीति की जरूरत है, जिसमें तकनीक, प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियां एक साथ तालमेल में काम करें। (सांकेतिक तस्वीर)

मौजूदा सिस्टम पर उठते रहे हैं सवालImage Credit : AI Image05 / 07

मौजूदा सिस्टम पर उठते रहे हैं सवाल

फिलहाल दिल्ली IITM पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) पर निर्भर है। विशेषज्ञों और अध्ययनों में इसकी डेटा विश्वसनीयता और पुराने उत्सर्जन आंकड़ों पर निर्भरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

गंभीर प्रदूषण पकड़ने में कमजोरीImage Credit : AI Image06 / 07

गंभीर प्रदूषण पकड़ने में कमजोरी

एक अध्ययन के अनुसार AQEWS ने भले ही प्रदूषण की भविष्यवाणी में सुधार किए हों, लेकिन अत्यधिक गंभीर प्रदूषण का सही अनुमान लगाने में इसकी क्षमता अब भी सीमित है। 2023-24 में जहां 15 में से सिर्फ एक गंभीर एपिसोड की भविष्यवाणी हो पाई थी, वहीं 2024-25 में 14 में से पांच मामलों का अनुमान लगाया गया। (सांकेतिक तस्वीर)

जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी तेजImage Credit : AI Image07 / 07

जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी तेज

दिल्ली सरकार ने बताया कि तकनीकी पहल के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बीते 24 घंटों में 340 से अधिक निर्माण स्थलों का निरीक्षण, 6,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों की सफाई और 7,000 से अधिक वाहन प्रदूषण चालान जारी किए गए हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

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