दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रदूषण से लड़ाई को वैज्ञानिक, दीर्घकालिक और रणनीतिक बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रतिक्रियात्मक फैसलों के बजाय रियल-टाइम डेटा और ठोस प्रमाणों के आधार पर कदम उठाना है। (सांकेतिक तस्वीर)
प्रस्तावित AI-सक्षम DSS यानी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के तहत हाइपरलोकल सोर्स से डाटा कलेक्शन, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस को शामिल किया जाएगा। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण के सटीक कारणों की पहचान आसान होगी। (सांकेतिक तस्वीर)
सरकार का फोकस पूरे शहर पर एक जैसे प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित कार्रवाई करने का है। डायनेमिक सोर्स अपॉर्शनमेंट के जरिए धूल, वाहन, उद्योग, बायोमास जलाने और क्षेत्रीय कारणों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। (सांकेतिक तस्वीर)
पर्यावरण मंत्री ने साफ किया कि प्रदूषण नियंत्रण मौसमी नहीं हो सकता। दिल्ली को सालभर लागू रहने वाली ऐसी नीति की जरूरत है, जिसमें तकनीक, प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियां एक साथ तालमेल में काम करें। (सांकेतिक तस्वीर)
फिलहाल दिल्ली IITM पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) पर निर्भर है। विशेषज्ञों और अध्ययनों में इसकी डेटा विश्वसनीयता और पुराने उत्सर्जन आंकड़ों पर निर्भरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। (सांकेतिक तस्वीर)
एक अध्ययन के अनुसार AQEWS ने भले ही प्रदूषण की भविष्यवाणी में सुधार किए हों, लेकिन अत्यधिक गंभीर प्रदूषण का सही अनुमान लगाने में इसकी क्षमता अब भी सीमित है। 2023-24 में जहां 15 में से सिर्फ एक गंभीर एपिसोड की भविष्यवाणी हो पाई थी, वहीं 2024-25 में 14 में से पांच मामलों का अनुमान लगाया गया। (सांकेतिक तस्वीर)
दिल्ली सरकार ने बताया कि तकनीकी पहल के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बीते 24 घंटों में 340 से अधिक निर्माण स्थलों का निरीक्षण, 6,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों की सफाई और 7,000 से अधिक वाहन प्रदूषण चालान जारी किए गए हैं। (सांकेतिक तस्वीर)